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Relationships Conflict Resolution Strategies; How To Manage Disputes | रिलेशनशिप- जब छोटी बहस बन जाए बड़ा झगड़ा: कॉन्फ्लिक्ट को कैसे सुलझाएं, सुनिए दुनिया के सबसे बड़े ‘कॉन्फ्लिक्ट एक्सपर्ट’ की सलाह

3 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई अपने आप में बिजी है। किसी के पास भी समय नहीं है। ऐसे में व्यक्ति एक रोबोट बनकर रह गया है। किसी के साथ अपनी भावनाएं साझा करना मुश्किल हो गया है। शायद यही कारण है कि लोगों में गुस्सा व चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है और इसका असर ऑफिस से लेकर घर तक में दिखाई भी दे रहा है।

वॉशिंगटन स्थित मल्टीनेशनल कंपनी गैलप (Gallup) हर साल एक ग्लोबल इमोशनल सर्वे रिपोर्ट जारी करती है। वर्ष 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में 54% लोग अकेलेपन और डिप्रेशन का अनुभव कर रहे हैं। गैलप की ही वर्ष 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में 23% लोग भयानक गुस्से का शिकार थे। पिछले कई सालों की रिपोर्ट देखें तो यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

लेकिन ये इमोशन सिर्फ गुस्से तक ही सीमित नहीं है। यही गुस्सा धीरे-धीरे तनाव पैदा करता है और फिर आगे चलकर कॉन्फ्लिक्ट क्रिएट करता है। इसके चलते कभी घर में अपने फैमिली मेंबर्स के साथ ​तो कभी ऑफिस में बॉस या को-वर्कर्स के साथ बहस और विवाद भी हो जाते हैं।

लेकिन यहां गंभीरता से देखने वाली बात ये है कि ये कॉन्फ्लिक्ट किसी व्यक्ति के मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य से लेकर उसके करियर व फैमिली लाइफ के लिए भी कितना घातक साबित होता है।

तो आज ‘रिलेशनशिप’ कॉलम में हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताएंगे, साथ ही जानेंगे कि-

  • कॉन्फ्लिक्ट कैसे नुकसान पहुंचाता है?
  • कॉन्फ्लिक्ट को कैसे सुलझाया जा सकता है?

रिलेशनशिप में कॉन्फ्लिक्ट आपको कैसे नुकसान पहुंचाता है?

अगर आपने घर में किसी फैमिली मेंबर से बहस कर ली तो यह निश्चित रूप से आपको मानसिक रूप से परेशान करेगा। इससे आपके काम और फैमिली लाइफ पर बुरा असर पड़ेगा। उदाहरण के लिए अगर आपने अपने पार्टनर से बहस कर ली तो आपका पूरा दिन खराब हो जाएगा। साथ ही ऑफिस जाने के बाद भी आप पूरे मन से काम नहीं कर पाएंगे।

केन सैंड अमेरिका के जाने-माने लाइफ कोच हैं, जो कॉन्फ्लिक्ट एक्सपर्ट के रूप में विख्यात हैं। कॉन्फ्लिक्ट को कैसे सुलझाया जाए, इस पर उनका तकरीबन 40 सालों का काम है। उन्होंने इस विषय पर एक किताब भी लिखी है, ‘रिजॉल्विंग एवरीडे कॉन्फ्लिक्ट।’ अपनी किताब में केन कॉन्फ्लिक्ट के खतरों को बहुत विस्तार से एक्सप्लेन करते हैं।

कॉन्फ्लिक्ट क्यों होता है?

केन सैंड लिखते हैं कि कॉन्फ्लिक्ट की सबसे बड़ी वजह तो इगो या अहम का टकराव होता है। जिस भी बात पर विवाद हुआ, वह दरअसल बहुत बड़ी बात होती भी नहीं, लेकिन वो बड़ी बन जाती है। इसलिए केन लिखते हैं कि किसी भी कॉन्फ्लिक्ट को समझने के लिए हमें खुद से कुछ जरूरी सवाल पूछने चाहिए-

कॉन्फ्लिक्ट को कैसे सुलझाएं

कॉन्फ्लिक्ट की तह में जाने, उसे समझने के बाद अब सबसे जरूरी सवाल ये है कि उसे सुलझाया कैसे जाए। इसके लिए भी केन सैंड कुछ अहम सुझाव देते हैं।

नीचे ग्राफिक में देखिए, फिर उसके बारे में विस्तार से बात करते हैं-

सीधे संवाद करें

दूसरों से शिकायत करने की बजाय सीधे उस व्यक्ति से बात करें, जिससे आपको समस्या है। इससे दोनों के बीच मनमुटाव की संभावनाएं कम होंगी और अपने दिल की बात कहने से आपका मन भी हल्का महसूस करेगा। सीधे बातचीत करना, फोन पर मैसेज करने या हर किसी से शिकायत करने से ज्यादा प्रभावी है। हालांकि बात करते वक्त आपको अपनी लैंग्वेज पर कंट्रोल रखना होगा।

सही समय का चुनाव करें

पहले से योजना बनाएं और बातचीत के लिए खुद को पर्याप्त समय दें। उदाहरण के लिए, जब दूसरा व्यक्ति डिनर बनाने के लिए जा रहा हो तो कॉन्फ्लिक्ट के बारे में बात करना शुरू न करें। ऐसी शांत जगह पर बात करने की कोशिश करें, जहां आप दोनों कूल होकर चर्चा कर सकें। इससे दोनों को एक-दूसरे की बात व भावनाएं समझ में आएंगी।

पहले से करें प्लानिंग

पहले से ही सोच लें कि आप क्या कहना चाहते हैं। सामने वाले को समझाएं कि समस्या क्या है और इसका आप पर क्या असर पड़ता है। इसके लिए पर्याप्त समय भी निकालें। प्री-प्लानिंग से बातचीत और आसान हो जाएगी।

दोषारोपण करने से बचें

दूसरे व्यक्ति को नाराज करने से उसके लिए आपकी बात सुनना और आपकी चिंताओं को समझना मुश्किल हो जाता है। हर बात के लिए सामने वाले व्यक्ति को दोष न दें या बातचीत की शुरुआत अपनी राय से न करें कि क्या किया जाना चाहिए।

मुद्दे पर बात करें और दूसरे पक्ष को भी सुनें

दूसरे व्यक्ति के व्यवहार की चर्चा न करें। इसकी बजाय अपनी भावनाओं के बारे में जानकारी दें। सामने वाले को भी अपना पक्ष पूरी तरह से रखने का मौका दें। यह जानने की कोशिश करें कि दूसरा व्यक्ति कैसा फील करता है।

दिखाएं कि आप सुन रहे हैं

अगर जो कहा जा रहा है, आप उस बात से सहमत नहीं हैं, तो भी दूसरे व्यक्ति को बताएं कि आप उसकी बात सुन रहे हैं और खुश हैं कि आप समस्या पर एक साथ चर्चा कर रहे हैं।

अधूरी बात न करें

एक बार जब आप बातचीत शुरू कर दें तो सभी मुद्दों और भावनाओं को खुलकर सामने लाएं। उस हिस्से को न छोड़ें, जो चर्चा के लिए बहुत ‘कठिन’ लगता है। यदि सभी मुद्दों पर गहन चर्चा की जाए तो समाधान जरूर मिलेगा।

समाधान पर काम करें

जब आप डिस्कशन में समाधान के टॉपिक पर पहुंच जाते हैं तो इस पर काम करना शुरू करें। आपसी व्यवहार में जो बदलाव करने का वादा किया है, उसे पूरी तरह से फॉलो करें।

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