2 घंटे पहलेलेखक: शशांक शुक्ला
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भारत में मिडिल एज के लोग तेजी से बीमारियों के चपेट में आ रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह खराब खान-पान और फिजिकल एक्टिविटी से दूरी है। पिछले दिनों ‘द लैंसेट’ ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, लगभग आधे भारतीय एडल्ट, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तय की गई फिजिकल एक्टिविटी स्तर को पूरा नहीं करते हैं। यह आदत हमारे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
साल 2000 से 2022 के बीच 197 देशों पर किए गए इस अध्ययन में भारतीय लोगों के फिजिकल एक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखा गया। भारत में साल 2000 में जहां 22.4% एडल्ट फिजिकल एक्टिविटी से दूर रहते थे। वहीं साल 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 45.4% हो गया।
कहीं आप भी तो इन आंकड़ों का हिस्सा नहीं बन रहे हैं? फिजिकल एक्टिविटी से दूर रहने पर दिल की बीमारियां, टाइप 2 डायबिटीज, मेंटल हेल्थ जैसी समस्याएं आपको अपनी चपेट में ले सकती हैं। अपनी आदतों को बदलकर हम इस खतरे से बच सकते हैं।
ऐसे में आज हम रिलेशनशिप में बात करेंगे कि-
- मिड एज में खुद को फिट कैसे रखें?
- एक्सरसाइज नापसंद हो तो क्या करें?
- न्यूनतम कितनी फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है?

कैसे करें मिड एज में एक्सरसाइज की शुरुआत?
मिड एज में फिट रहना काफी कठिन होता है। अक्सर हम उम्र बढ़ने के साथ कमजोरी महसूस करते हैं, लेकिन थोड़ी सी मेहनत और सही दिशा में किए गए प्रयास से आप अपनी सेहत में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। सबसे पहले, व्यायाम की शुरुआत छोटे कदमों से करें। रोज 15-20 मिनट की वॉक से शुरुआत करें और इसे धीरे-धीरे बढ़ाएं। साथ ही संतुलित आहार जरूर लें। ताजे फल, सब्जियां और प्रोटीन से भरपूर खाना आपके शरीर को सही न्यूट्रिएंट्स देगा।
एक्सरसाइज करना नापसंद है तो क्या करें?
हममें से किसी को भी मेहनत करना पसंद नहीं होता है। अगर हम मेहनत कर रहे होते हैं तो वह भी आराम पाने के लिए कर रहे होते हैं। वह चाहे नौकरी के जरिए संसाधन जुटाने की कोशिश हो या खेती के जरिए अनाज।
जब हम बाकी काम कर सकते हैं तो फिट रहने के लिए आधे घंटे वर्कआउट क्यों नहीं कर सकते? हम छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हुए अपनी सेहत में बड़ा फर्क ला सकते हैं। यहां ऐसी एक्टिविटीज के बारे में बात करेंगे, जिनके जरिए हम खुद को हेल्दी बना सकते हैं।

फिट रहने के लिए कितनी एक्टिविटी जरूरी?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एक एडल्ट को हर सप्ताह 150 मिनट की हल्की एक्सरसाइज या 75 मिनट की हैवी एक्टिविटी करनी चाहिए।

कैसे करें सुरक्षित शुरुआत?
यदि पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या हो तो अपने डॉक्टर से सलाह लें। शरीर में कोई परेशानी या तकलीफ महसूस हो, तो रुक जाएं। धीरे-धीरे अपनी दिनचर्या में व्यायाम को शामिल करें। शुरुआत में आसान एक्सरसाइज करें। जैसे चेयर एक्सरसाइज या स्विमिंग करें। हमेशा अपनी उम्र को ध्यान में रखकर हल्के व्यायाम करें।
फिजिकल एक्टिविटी के साथ सही डाइट भी बहुत जरूरी है। अपनी डाइट में प्रोटीन शामिल करें और प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट्स की बजाय नट्स और योगर्ट खाएं। जब आहार और व्यायाम दोनों का सही संतुलन होगा तो न केवल आपका शरीर, बल्कि आपका मन भी स्वस्थ रहेगा।
खुद को एक्सरसाइज के लिए करें मोटिवेट
दिनचर्या में बदलाव की वजह से कई बार रूटीन टूट जाता है। ऐसे में फिट रहना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन कुछ आसान तरीकों से हम खुद को मोटिवेट कर सकते हैं। जैसे छुट्टियों के दौरान बाहर हैं तो होटल के फिटनेस सेंटर का उपयोग करें। सफर के दौरान, पैदल घूमने की कोशिश करें।
यदि आपका एक्सरसाइज पार्टनर दूर चला गया है, तो किसी नए दोस्त के साथ व्यायाम करें। आसपास के फिटनेस सेंटर, पार्क और चल रही फिटनेस एक्टिविटीज का पता लगाएं। अगर बीमारी या चोट के कारण आप कुछ समय के लिए सक्रिय नहीं हो पाए, तो धीरे-धीरे अपने पुराने रूटीन की ओर वापस लौटने की कोशिश करें।
बढ़ती हुई उम्र के लिए एक्सरसाइज प्लान
बढ़ती हुई उम्र के लिए सबसे मुश्किल एक्सरसाइज का चुनाव है। कई बार हम अधिक प्रयास करने के चक्कर में खुद को चोटिल कर बैठते हैं। ऐसे में इससे बचते हुए हमें ऐसी एक्सरसाइज का चुनाव करना चाहिए, जिससे हम फिट रहें और इंजरी से भी बचे रहें।
संतुलन
संतुलन बनाए रखना किसी भी उम्र में जरूरी है। योग, स्ट्रेचिंग या किसी पोस्चर एक्सरसाइज से आपका संतुलन बेहतर हो सकता है। इससे हमारे चलने का तरीका बेहतर होता है। यह आपके आत्मविश्वास को भी बढ़ाने में मदद करता है।
कार्डियो
तेज चलना, सीढ़ियां चढ़ना, स्विमिंग यह सब कार्डियो एक्सरसाइज हैं। ये एक्टिविटीज दिल की सेहत को मजबूत बनाने में मदद करती हैं। घर के कामों से लेकर शॉपिंग तक, कार्डियो से आपके रोजमर्रा के काम भी आसान होते हैं और आप थकान नहीं महसूस करते हैं।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
स्ट्रेंथ और पॉवर ट्रेनिंग से मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती हैं। इससे आप देर तक बिना थकान के काम कर सकते हैं। साथ ही शरीर मजबूत बनता है।
फ्लेक्सिबिलिटी
योग या स्ट्रेचिंग आपके शरीर को लचीला बनाए रखता है। इससे आपको छोटे-छोटे कामों के दौरान मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या से नहीं गुजरना पड़ता है।




