2 घंटे पहलेलेखक: शैली आचार्य
- कॉपी लिंक

नवरात्रि श्रद्धा, आस्था, प्रेम और सद्भावना का त्योहार है। इस पर्व पर मां दुर्गा के प्रति आस्था रखने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए लोग नौ दिनों का व्रत रखते हैं। कुछ लोग कई चीजों का त्याग भी करते हैं, जैसेकि मांस, शराब, अंडा वगैरह।
इस पर्व को लेकर लोगों की मान्यता है कि इन 9 दिनों में रखे जाने वाले व्रत आत्मा की शुद्धता के लिए होते हैं। मन को तो हम शुद्ध कर लेते हैं, लेकिन अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए हम क्या बदलाव कर रहे हैं। जरा सोचिए कि आपने जिंदगी को बेहतर बनाने के कौन-सी अच्छी आदतें अपनाई हैं और किन बुरी आदतों को छोड़ा है।
हम सभी के अंदर कोई-न-कोई खराब आदत होती है, जैसेकि झूठ बोलना, लापरवाही करना, ज्यादा गुस्सा करना या काम को टालते रहना।
तो इन बुरी आदतों को दूर करने का नवरात्रि से बेहतर अवसर और क्या हो सकता है। इन दिनों आप कोशिश कर सकते हैं कि आपके अंदर जो भी खराब आदतें हैं, उन्हें आज ही छोड़ने का संकल्प लें। आदतों की फेहरिस्त तैयार कीजिए और देखिए कि किन आदतों में सुधार करने की जरूरत है।
तो आज रिलेशनशिप कॉलम में बात करेंगे, उन खराब आदतों की, जो हमें नवरात्रि में छोड़ देनी चाहिए।
इस विषय पर दैनिक भास्कर ने भोपाल की काउंसिलिंग साइकोलॉजिस्ट अदिति सक्सेना से बात की। उन्होंने कुछ पर्सनैलिटी ट्रेट्स के बारे में बताया, जो हमें जीवन में आगे बढ़ने से रोकते हैं। साथ ही कुछ आसान तरीके बताए, जिससे हम उन कमियों से छुटकारा पा सकते हैं। नीचे दी जानकारी उन्हीं से की गई बातचीत पर आधारित है।
इस नवरात्रि पर इन 9 बुरी आदतों को छोड़ने का लें संकल्प
जीवन में बुरी या खराब आदतें अपनाना आसान होता है, लेकिन उनसे निजात पाना बहुत मुश्किल। हमें खराब आदतें कब लग जाती हैं, पता ही नहीं चलता। जब यह हमारे निजी जीवन और रिश्तों पर असर डालने लगती हैं, तब इन्हें छोड़ना जरूरी हो जाता है।

आलस ही इंसान का दुश्मन है
आलस हमारे जीवन में बहुत बड़ी बाधा है। यह हमारी प्रगति और सफलता को रोकती है। आलस के कारण हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाते हैं। इससे कई नुकसान हो सकते हैं, जैसेकि समय की बर्बादी, लक्ष्यों में देरी होना, आत्मविश्वास में कमी, जीवन में स्थिरता न होना और कई तरह की मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं।
इसे त्यागने के लिए अपनाएं ये तरीके-
- समय का प्रबंधन करना सीखें, काम को वक्त के अनुसार बांट लें।
- लक्ष्य से भटकें नहीं। यह सोचें कि आप अपने आपको आने वाले सालों में कहां देखते हैं और उसके लिए आपको कितनी मेहनत करनी होगी।
- नियमित व्यायाम करें, इससे आपको आलस दूर करने में मदद मिलेगी।
- फास्ट फूड और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड को कहें ‘NO’ और पर्याप्त नींद लें।
गुस्से पर पाएं काबू
जब हमारा कोई काम बेहतर तरीके से नहीं होता या फिर कोई हमारे साथ बुरा करता है, तब हमें काफी गुस्सा आता है। कई बार हम अपनों पर भी बेफिजूल गुस्सा कर देते हैं। लेकिन इससे नुकसान किसी दूसरे का नहीं, सिर्फ हमारा ही होता है। जब इंसान गुस्से में होता है तो वो अपने आसपास मौजूद लोगों से भी बुरी तरह पेश आता है। इससे रिश्ते खराब हो सकते हैं।
ऐसे में जब भी गुस्सा आए, तो आप ये तरीके अपना सकते हैं-
- सबसे पहले गहरी सांस लें और गुस्सा जताने की बजाय खुली हवा में टहलें।
- गुस्सा आने पर उस जगह से चले जाएं और शांत जगह पर कुछ देर अकेले बैठें।
- गुस्सा आने से पहले एक पल रुकें और शांति से सोचें कि कहीं यह आपकी सेहत को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहा।
- अगर आपको ज्यादा गुस्सा आता है तो ध्यान और योग का भी सहारा ले सकते हैं। इससे आपको अपने भीतर सकारात्मक बदलाव नजर आएंगे।
अहंकार का करें त्याग
अगर आप किसी से कहीं ज्यादा बेहतर और सफल हैं तो इस पर गर्व करें, अभिमान नहीं। अभिमान या अहंकार हमारे दिमाग, हमारी सोच से पैदा होता है। इससे दूरी बनाने के लिए सबसे पहले दूसरों से अपनी तुलना करना बंद कर दें। किसी भी इंसान के अंदर अहंकार तभी आता है, जब वह अपने आप को दूसरों से श्रेष्ठ समझने लगता है। अहंकार का त्याग करने के लिए अपनाएं यह सुझाव-
- ये सोचकर मत चलिए कि आपको सब आता है, बल्कि यह सोचिए कि अभी और सीखने की जरूरत है।
- अपने विचारों और काम का विश्लेषण करें और देखें कि कहीं आप में अहंकार तो नहीं है।
- अपनी उपलब्धियों का श्रेय दूसरों को दें और अपनी गलतियों को स्वीकार करें।
- अपने अंदर के अहंकार को पहचानें और उसे बदलने की कोशिश करें।
टालमटोली
‘आज इसे रहने देते हैं, यह कल करेंगे।’ क्या आप भी ऐसा कहकर अधिकतर कामों को अगले दिन के लिए टाल देते हैं। अगर हां तो ऐसे आप अपने कई जरूरी कामों को कल पर टाल देंगे और लक्ष्य तक पहुंचने में भी लेट हो जाएंगे। हर काम को टालने की आदत टालमटोली कहलाती है, जिसे अंग्रेजी में कहते हैं प्रोक्रैस्टिनेशन। ये आदत हमें आलसी बना सकती है।
- महात्मा गांधी का एक कथन है- “आज की कोशिश ही कल की सफलता की बुनियाद है।”
- इसलिए अपने कामों को प्राथमिकता दें और समय सीमा तय करें।
- अपने लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से सेट करें और उन्हें पाने के लिए काम करें।
एक झूठ बुलवाता है 100 झूठ
सच्चाई और ईमानदारी के लिए हमें झूठ को छोड़ देना चाहिए क्योंकि याद रहे, एक झूठ को छिपाने के लिए 100 झूठ बोलने पड़ते हैं। यह मुहावरा इस बात पर जोर देता है कि झूठ बोलना एक बुरी और कंट्रोल न होने वाली प्रक्रिया है, जो एक छोटे से झूठ से शुरू होकर बड़े-बड़े झूठ तक पहुंच जाती है। कोशिश करें कि जो सच है, उसे ही स्वीकारें और सबके सामने रखें।
लालच बुरी बला है
बिल्कुल सही कहा गया है। लालच वास्तव में बुरी बला है, जो हमें हमारे जीवन के सही मूल्यों और लक्ष्यों से दूर कर सकती है। लालच के कारण हम अपने रिश्ते, स्वास्थ्य और आत्मसम्मान को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
लालच को छोड़ने के फायदे-
- जब हम लालच को छोड़ते हैं, तो अपने जीवन में संतुष्टि महसूस करते हैं।
- लालच छोड़ने पर हमारा मन शांत और स्थिर रहता है और हमारा आत्मसम्मान बढ़ता है।
बुरी आदतें छोड़ने से आएगा सकारात्मक बदलाव
कई बार इन आदतों का असर रिश्तों पर भी पड़ता है और हमारे जीवन पर भी। जितनी अच्छी आदतें अपनाएंगे, उतना ही जीवन खुशी से बिता सकेंगे। खुद को बेहतर और रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए ये बहुत जरूरी है।
हम क्या कहते हैं, कैसा व्यवहार करते हैं, इस पर हमारी छवि निर्भर करती है। जब छवि बिगड़ती है, तो आसपास मौजूद लोगों से रिश्ते खराब होने लगते हैं। मानसिक तनाव बढ़ता है। पर इनमें सुधार लाने के लिए पहले इनके बारे में जानना जरूरी है। और सुधार लाना कैसे है, सचेतनता इसमें आपकी मदद कर सकती है।

तो इस नवरात्रि के अवसर पर इन खराब आदतों को छोड़ने का संकल्प लें और अपने जीवन को बेहतर बनाएं।




