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Navratri Goddess Durga Nine Devi Names; Meaning Importance | Navadurga | रिलेशनशिप- मां दुर्गा के नौ रूप 9 मूल्यों का प्रतीक: अगर ये बातें जिंदगी में उतार लें तो प्रोफेशनल सक्सेस आपके पीछे आएगी

59 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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भारत में सबसे ज्यादा मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक नवरात्रि, देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा को समर्पित है। ये नौ दिन बुराई पर अच्छाई की जीत के साथ-साथ शरीर, मन और आत्मा के रिन्यूअल का प्रतीक भी हैं।

जहां नवरात्रि को पारंपरिक रूप से उपवास और भक्ति के समय के रूप में देखा जाता है, वहीं यह वेलनेस ट्रांसफॉर्मेशन के लिए एक पावरफुल फ्रेमवर्क के रूप में भी काम कर सकता है। प्रत्येक दिन के पीछे के गहरे अर्थों के साथ जुड़कर आप एक पर्सनल वेलनेस जर्नी शुरू कर सकते हैं, जो आपके लिए लाभदायक साबित होगी।

आइए इस बात पर गहराई से विचार करें कि नवरात्रि का प्रत्येक दिन आपके ट्रांसफॉर्मेशन के लिए कैसे एक यूनीक फेज काे रिप्रेजेंट करता है। नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा नौ रूपों में प्रकट होती हैं। वो 9 रूप 9 अलग मानवीय गुणों का प्रतीक हैं। ये वे गुण हैं, जिन्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में आत्मसात करना हमारी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को बेहतर बना सकता है।

तो आज रिलेशनशिप कॉलम में इस बारे में बात करेंगे कि नवरात्रि के नौ दिनों में आप देवी दुर्गा के 9 अलग-अलग रूपों से क्या कुछ सीख सकते हैं, जो आपकी वर्किंग लाइफ को आसान बना सके।

आगे बढ़ने से पहले ग्राफिक में देखिए कि सभी नौ देवियां किन 9 जीवन मूल्यों का प्रतीक हैं।

अब आइए इस बारे में विस्तार से बात करते हैं कि हम माता के नौ स्वरूपों से क्या सीख सकते हैं, जो हमारी वर्किंग लाइफ में भी काम आएंगे।

मां शैलपुत्री से क्या सीखें?

देवी शैलपुत्री मां दुर्गा का पहला अवतार हैं। इनको पहाड़ों की बेटी भी कहा जाता है। शैल का अर्थ होता है पर्वत और पुत्री का मतलब बेटी। मां शैलपुत्री हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहना सिखाती हैं। जिस तरह एक पहाड़ ऊंचा और दृढ़ रहता है, उसी तरह वह लोगों को अपने विश्वासों और मूल्यों पर अडिग रहना सिखाती हैं। मां शैलपुत्री मनुष्यों को अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने और उसका उपयोग करने, चुनौतियों का सामना करने के लिए मजबूत बने रहने और विजयी होने के लिए प्रेरित करती हैं। ऊपर दी गई इन बातों को हम अपनी वर्क लाइफ में फॉलो करके अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त करते हैं।

मां ब्रम्हचारिणी से क्या सीखें?

नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। वह तपस्या और संयम की प्रतीक हैं और लोगों को आत्म-अनुशासन व समर्पण का मूल्य सिखाती हैं। मां ब्रह्मचारिणी सिखाती हैं कि कैसे जीवन में कुछ संयम का अभ्यास करके और अपनी ऊर्जा को सही जगह पर लगाकर आप सफलता हासिल कर सकते हैं।

वर्क लाइफ में संयम और आत्म-अनुशासन का होना बहुत जरूरी है। जब आपके अंदर ये चीजें होंगी तो आप समय पर उठेंगे, समय पर सोएंगे, समय पर ऑफिस पहुंचेंगे और समय पर सारे काम भी पूरे करेंगे। संयमित जीवन आपको हमेशा खुश रखता है।

माता चंद्रघंटा से क्या सीखें?

नवरात्रि के तीसरे दिन पूजी जाने वाली मां चंद्रघंटा के माथे पर अर्धचंद्र होता है। वह शांति और स्थिरता का प्रतीक हैं। ऐसा माना जाता है कि मां चंद्रघंटा लोगों को सिखाती हैं कि समस्याओं से घिरे होने के बावजूद शांति और आंतरिक संतुलन बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है।

जिस तरह चंद्रमा पूरी रात शांत रहता है, ठीक उसी तरह वह प्रतिकूल परिस्थितियों में भी चिंता मुक्त रहना सिखाती हैं। हालांकि ये थोड़ा कठिन है, लेकिन इसे अपनाकर हम अपनी वर्क लाइफ को संतुलित बना सकते हैं और स्ट्रेस फ्री रह सकते हैं।

मां कूष्मांडा से क्या सीखें?

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है, जिन्हें सृष्टिकर्ता के रूप में भी जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि मां कूष्मांडा लोगों को अपनी ऊर्जा को सही दिशा में ले जाने के लिए प्रेरित करती हैं। इनसे हमें सीख मिलती है कि हम ऑफिस में अपनी उर्जा को सही काम में खर्च करें। इससे सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।

स्कंदमाता से क्या सीखें?

स्कंदमाता मातृ प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक हैं। वह लोगों को बिना शर्त प्यार बरसाने के तरीके सिखाती हैं और कभी-कभी प्यार के लिए किए जाने वाले त्याग की भी सीख देती हैं। स्कंदमाता हमें पर्सनल लाइफ को मैनेज करने के लिए एक मूल मंत्र देती हैं, वह है प्यार में समर्पण और त्याग। ये एक मजबूत रिश्ते के लिए सबसे बड़ी और अहम चीज है।

मां कात्यायनी से क्या सीखें?

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है। मां कात्यायनी साहस व शक्ति की प्रतीक हैं और हमें बिना किसी चिंता के अपने डर का सामना करना सिखाती हैं। मां कात्यायनी लोगों को यह भी सिखाती हैं कि हमेशा सही के लिए खड़ा होना चाहिए और एक योद्धा की तरह चुनौतियों का सामना करना चाहिए। मां कात्यायनी हमें अपनी प्रोफेशनल लाइफ में किसी भी चुनौती का डटकर सामना करने की सीख देती हैं।

मां कालरात्रि से क्या सीखें?

नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के उग्र रूप मां कालरात्रि की पूजा होती है। मां कालरात्रि बुरी शक्तियों के विनाश और उनके चंगुल से मुक्ति का प्रतीक हैं। मां कालरात्रि लोगों को दो बातें सिखाती हैं- पहली यह कि चुनौतियों का सामना करने के लिए साहस और उग्रता दिखानी चाहिए और दूसरी यह कि आसक्ति का त्याग कर देना चाहिए। इससे हमें ये सीख मिलती है कि किसी भी काम के लिए साहस के साथ-साथ हिम्मत की भी जरूरत है।

मां महागौरी से क्या सीखें?

माता महागौरी को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। वह लोगों को आंतरिक-शुद्धि और आत्म-चिंतन का महत्व सिखाती हैं। इससे हमें ये सीख मिलती है कि ऑफिस में खुद की परफॉर्मेंस का आकलन करते रहना चाहिए। साथ ही किसी के प्रति ईर्ष्या-द्वेष की भावना नहीं रखनी चाहिए।

मां सिद्धिदात्री से क्या सीखें?

मां सिद्धिदात्री दिव्य ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक हैं। वह लोगों को सही मार्ग पर चलना व हमेशा सत्य की तलाश करना सिखाती हैं। मां सिद्धिदात्री हमें सिखाती हैं कि झूठ कभी नहीं बोलना चाहिए और सत्य के मार्ग पर चलकर आप किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।

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