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Navjot Sidhu Wife Cancer Treatment Diet Plan; Sugar | Autophagy | सेहतनामा- कैंसर डाइट पर सिद्धू कितने सही: क्या डाइट सचमुच मददगार है, कैंसर में क्या खाना चाहिए, डॉक्टर की जरूरी सलाह

28 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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पूर्व भारतीय क्रिकेटर और पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कहा कि उनकी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू अब कैंसर से मुक्त हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि नवजोत कौर ने दवाओं के साथ डाइट में कुछ खास चीजें शामिल करके चौथे स्टेज के कैंसर पर काबू पा लिया है।

उनका यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है। कुछ लोग सिद्धू की तारीफ कर रहे हैं और भारतीय औषधि पद्धति को मौजूदा मेडिकल साइंस से ज्यादा वैज्ञानिक बता रहे हैं। जबकि टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के कैंसर स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स ने इस दावे पर असहमति जताई है। उन्होंने कहा है कि इस बात के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।

छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने सिद्धू को 850 करोड़ रुपये का नोटिस भेजा है। इसके संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी का आरोप है कि इस तरह के झूठे दावे लोगों को भ्रमित करते हैं। लोगों के मन में एलोपैथिक दवा को लेकर नकारात्मक विचार आते हैं। इससे लोगों की मौत का खतरा बढ़ सकता है।

अब सवाल उठता है कि सच क्या है और कैंसर के इलाज में डाइट की क्या भूमिका है।

इसलिए आज ‘सेहतनामा’ में हम जानेंगे कि कैंसर के इलाज के दौरान खानपान कैसा होना चाहिए। साथ ही जानेंगे कि-

  • मीठा खाने से कैंसर सेल्स पर क्या असर पड़ता है?
  • सिद्धू ने जिस ऑटोफेजी का जिक्र किया, वो क्या है?

सिद्धू की पत्नी ने क्या खाया?

नवजोत सिंह सिद्धू के मुताबिक, उनकी पत्नी ने इलाज के साथ नींबू पानी, कच्ची हल्दी, सेब का सिरका, नीम की पत्तियां, तुलसी, कद्दू, अनार, आंवला, चुकंदर और अखरोट जैसी चीजें अपनी डाइट में शामिल की थीं। इससे उन्हें स्वस्थ होने में मदद मिली।

ट्रीटमेंट के साथ फॉलो की सही डाइट

नवजोत सिंह सिद्धू ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड करके बताया है कि उनकी पत्नी ने यह डाइट प्लान कैंसर के ट्रीटमेंट के साथ फॉलो किया है। यह डाइट प्लान भी कैंसर के बड़े डॉक्टर्स की टीम की देखरेख में बनाया गया था।

कैंसर सेल्स को न खिलाएं शुगर

नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि कैंसर सेल्स को शुगर न खिलाएं। शुगर से उन्हें तेजी से ग्रो करने में मदद मिलती है। इसे लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं ।

इसे ऐसे समझिए कि हमारे शरीर में करीब 30 ट्रिलियन यानी 30 लाख करोड़ कोशिकाएं हैं। ये सभी एक निश्चित पैटर्न में नियंत्रित तरीके से बढ़ती रहती हैं और एक समय के बाद खुद ही नष्ट भी हो जाती हैं। इस प्रक्रिया के लिए इन्हें ऊर्जा की जरूरत होती है, जो शरीर में मौजूद ग्लूकोज से मिलती है। अगर इन्हें पर्याप्त शुगर न मिले तो यह प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है।

इसके अलावा शुगर मोटापे के लिए जिम्मेदार है और मोटापा कैंसर के लिए बड़ा रिस्क फैक्टर है। इसलिए कैंसर होने पर डाइट से शुगर हटाना ही बेहतर है।

सवाल ये भी हो सकता है कि शुगर के बिना तो स्वस्थ कोशिकाएं भी नष्ट होने लगेंगी। इसका जवाब ये है कि नवजोत सिंह सिद्धू और उनके डॉक्टर्स ऐडेड शुगर और चीनी खाने से मना कर रहे हैं। फल और सब्जियों से मिल रहा शुगर अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

ऑटोफेजी क्या है

नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने वीडियो में जापानी वैज्ञानिक योशिनोरी ओशुमी का जिक्र किया है और ऑटोफेजी का उदाहरण दिया है। योशिनोरी को ऑटोफेजी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने और इसे कैंसर के इलाज में प्रभावी बताने के लिए नोबेल प्राइज मिला था।

ऑटोफेजी एक प्राकृतिक कोशिका प्रक्रिया है। ऑटो का मतलब होता है स्व और फेजी का मतलब है खाना। इस शब्द का मतलब है– खुद को खाना। जब हम लगातार 24 से 48 घंटे तक कुछ नहीं खाते हैं तो सेल्स ऑटोफेजी प्रक्रिया शुरू कर देती हैं। यह सबकुछ बहुत नियमबद्ध तरीके से होता है। इसमें सेल्स सबसे पहले सबसे खराब सेल्स को खाती हैं। इसके बाद यह क्रम जारी रहता है।

अगर यह प्रक्रिया लगातार कई घंटे तक जारी रहे तो हमारा शरीर पुनर्चक्रण की प्रक्रिया में चला जाता है। आखिर में शरीर में सबसे स्वस्थ कोशिकाएं ही बचती हैं। कैंसर कोशिकाएं शरीर के लिए सबसे खराब कोशिकाएं होती हैं। इसलिए माना जाता है कि ऑटोफेजी के दौरान स्वस्थ कोशिकाएं इन्हें खाकर खत्म कर देती हैं।

हालांकि इस बारे में अधिक रिसर्च की जरूरत है। इसमें यह भी पता लगाने की जरूरत है कि यह प्रक्रिया किस तरह के कैंसर में और किस स्टेज तक प्रभावी है। इसे खुद से अपनाने की कोशिश न करें। यह डॉक्टर की सलाह के बिना खतरनाक हो सकता है।

कैंसर के इलाज के दौरान डाइट कैसी होनी चाहिए?

कैंसर के इलाज के दौरान शरीर कई मुश्किलों से गुजरता है। भूख कम हो जाती है। पाचन तंत्र खराब हो जाता है। इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है और कई ऑर्गन्स ठीक से काम करना बंद कर देते हैं। यह सब इलाज में दी जा रही दवाओं और थेरेपीज का साइड इफेक्ट होता है।

ऐसे में इलाज के साथ सही डाइट प्लान कैंसर से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आमतौर पर इस तरह की डाइट में प्लांट बेस्ड प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स बढ़ा दिए जाते हैं। हालांकि यह पेशेंट की ओवरऑल हेल्थ, कैंसर के प्रकार और कैंसर की स्टेज पर भी निर्भर करता है।

ऐसी होनी चाहिए कैंसर पेशेंट की डाइट:

प्लांट बेस्ड प्रोटीन

कीमोथेरेपी या अन्य कैंसर ट्रीटमेंट के दौरान खाने के लिए सबसे अच्छा फूड प्लांट बेस्ड प्रोटीन है। इनमें ढेर सारे विटामिन्स और मिनरल्स भी होते हैं।

इसका मतलब है कि भोजन में खूब सारी हरी सब्जियां, बीन्स, फलियां, मेवे और सीड्स शामिल करने चाहिए। इस दौरान एनिमल प्रोटीन न खाना बेहतर है।

हेल्दी फैट

कैंसर के इलाज के दौरान फैट को लेकर बहुत सतर्कता बरतनी चाहिए। मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैट इस्तेमाल करने के कई हेल्थ बेनिफिट्स हो सकते हैं।

एवाकाडो, जैतून का तेल, अंगूर के बीज का तेल और अखरोट सभी ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं। ये इंफ्लेमेशन कम करके हार्ट हेल्थ में सुधार करते हैं।

हेल्दी कार्ब्स

कैंसर के इलाज के दौरान कार्ब्स चुनते समय पहली शर्त ये है कि ये कम-से-कम प्रॉसेस्ड होने चाहिए। इसमें मिलेट्स खाए जा सकते हैं। अगर गेहूं का आटा खा रहे हैं तो चोकरयुक्त खाना चाहिए।

इनमें घुलनशील फाइबर होता है, जो गट में अच्छे बैक्टीरिया को बनाए रखने में मदद करता है। घुलनशील फाइबर से शॉर्ट-चेन फैटी एसिड का उत्पादन भी बढ़ता है। इससे मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और सेलुलर रिपेयर में भी मदद मिलती है।

विटामिन्स और मिनरल्स

विटामिन और मिनरल्स हमारे शरीर की एंजाइमेटिक प्रक्रियाओं में मदद करते हैं। ये इम्यून फंक्शन को बेहतर करने और इंफ्लेमेशन कम करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। कोशिश करें कि फूड विटामिन D से भरपूर हो। इनमें दूध, संतरे का जूस, दही और अनाज जैसी चीजें हो सकती हैं। ………………….. सेहत से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए सर्दियों के सुपरफूड- रोज एक टुकड़ा गुड़ बचाएगा एनीमिया से:पीरियड्स करे रेगुलर, प्रेग्नेंसी में लाभकारी

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