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How To Say Sorry (Relationship Apology Benefits And Tips) | रिलेशनशिप- सिर्फ एक सॉरी से बन सकती है बिगड़ी बात: कब और कैसे मांगें माफी, सॉरी कहने के 7 फायदे, रिलेशनशिप कोच के 10 टिप्स

38 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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गलतियां हर किसी से होती हैं। इस दुनिया में कोई भी परफेक्ट नहीं है। हम सब कभी-न-कभी जाने-अनजाने ऐसा कर बैठते हैं, जब हमारी किसी बात से किसी के दिल को चोट पहुंचती है। गलती करना बुरा नहीं है, गलती करके उसे स्वीकार न करना बुरा है। गलतियां उतनी बड़ी नहीं होंगी, अगर आप उसके लिए सॉरी बोल देंगे। लेकिन ‘आई एम सॉरी’ बोलना या लिखना जितना आसान है, सचमुच में दिल से उसे महसूस करना और माफी मांगना उतना आसान नहीं है।

  • आखिर माफी मांगना इतना मुश्किल क्यों है?
  • माफी क्यों और कैसे मांगनी चाहिए?
  • माफी मांगने का परफेक्ट तरीका क्या है?
  • अपनी गलती स्वीकार न करने से हमारे रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

आज के रिलेशनिशप कॉलम में हम इन्हीं कुछ सवालों का जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे।

माफी मांगना मुश्किल क्यों है?

अगर यह इतना ही आसान होता तो दुनिया में सब लोग अपनी गलतियां स्वीकार करके माफी मांग लेते और इतने झगड़े-विवाद ही नहीं होते।

रिसर्च जर्नल ‘सेज’ में इस पर हुई एक सोशल साइंस स्टडी प्रकाशित हुई। इस स्टडी के मानें तो लोगों के माफी न मांगने के कुछ मुख्य कारण इस प्रकार हैं-

  • उन्हें दूसरे व्यक्ति की वास्तव में चिंता नहीं होती।
  • माफी मांगने से उनकी स्वयं की छवि को धक्का पहुंचता है।
  • उन्हें लगता है कि माफी मांगने से वैसे भी कोई फायदा नहीं होगा।

माफी मांगना क्यों जरूरी है?

अगर आपको अपनी किसी गलती का एहसास है और आप उसे स्वीकार करते हुए ये कहते हैं कि अब आगे से ऐसा नहीं होगा तो यही माफी मांगना है। माफी मांगने या सॉरी बोलने से यह पता चलता है कि आपको अपने किए या कहे का पछतावा है। आपको पता है कि वह गलत था और भविष्य में ऐसा दोबारा न हो, इसके लिए आप और ज्यादा प्रयास करेंगे।

जब आप गलत होते हैं तो माफी न मांगना पर्सनल और प्रोफेशनल रिलेशनशिप के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इससे गुस्सा, नाराजगी और दुश्मनी भी हो सकती है, जो समय के साथ बढ़ सकती है।

सच्ची माफी का मतलब है गलतियों से सीखना

रिश्ते में माफी मांगना या गलती स्वीकार कर लेना आपके रिलेशनशिप को मजबूती प्रदान करता है। हालांकि ये उतना आसान नहीं है, जितना लोगों काे लगता है क्योंकि आपका ईगो या स्वभाव यह करने नहीं देता है।

ईमानदार तरीके से मांगी गई माफी वह होती है, जो सच्ची सहानुभूति, पश्चाताप और खेद के साथ-साथ अपनी गलतियों से सीखने का वादा भी करती है। दूसरे शब्दों में कहें तो आपको वास्तव में यह मानने की जरूरत है कि आपने कुछ गलत किया है, जिसके लिए आपको खेद है।

माफी कब मांगें?

यह जानना कि कब माफी मांगनी है, उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि यह जानना कि कैसे माफी मांगनी है। इसे नीचे दिए गए पॉइंटर्स से समझें।

  • अगर आपको डाउट है कि आपने जो कुछ किया है, जान-बूझकर या गलती से, उससे किसी और को बुरा लगा है, तो माफी मांगना और स्थिति को स्पष्ट करना बहुत जरूरी है।
  • आपने जो किया है, अगर वह आपके साथ होता तो आपको बुरा लगता। अगर ऐसा है तो जाहिर है दूसरे को भी बुरा लगा है। ऐसे में माफी जरूर मांगनी चाहिए।
  • माफी मांगने से न केवल आपको अपनी गलतियों को ‘स्वीकार’ करने का मौका मिलता है, बल्कि यह भी पता चलता है कि आप जो सोचते हैं, वह सही था या गलत।
  • अगर आपने जान-बूझकर कुछ नहीं किया, लेकिन अनजाने में आपकी बात से किसी को चोट पहुंची या तकलीफ हुई तो भी माफी मांगना एक सही फैसला है।

जहां ईमानदारी से माफी मांगना रिश्ते को बेहतर बनाने में मददगार हो सकता है, वहीं लोग अक्सर यह नहीं करना चाहते हैं। यह स्वीकार करना कि आप गलत थे, बहुत कठिन है। माफी मांगते वक्त किन बातों का ख्याल रखना जरूरी है, नीचे ग्राफिक में समझिए।

माफी मांगने के लिए कभी देर नहीं होती

अगर माफी मांगने का मौका मिलने से पहले ही लोग आपकी जिंदगी से चले जाते हैं या हालात इतने खराब हो जाते हैं कि माफी मांगना संभव नहीं लगता तो खुद को याद दिलाएं कि माफी मांगने में कभी देर नहीं हुई होती। भले ही आपको लगे कि सुलह करने का विचार निराशाजनक है, फिर भी यह कोशिश की जा सकती है। भावनाओं को दबाए रखना अच्छा नहीं है, खासकर अगर आपमें चीजों को सही करने की इच्छा हो।

अगर आपको लगता है कि किसी के साथ रिश्ता फिर से बनाने की कोशिश छोड़ देनी चाहिए तो सोचें कि पछतावे के साथ जीना कैसा लगेगा। अगर आपने किसी ऐसे व्यक्ति को चोट पहुंचाई है, जिसे आप प्यार करते हैं (भले वह प्यार रोमांटिक हो या न हो) तो कोशिश कभी नहीं छोड़नी चाहिए।

हमेशा छोटों से ही क्यों की जाती है माफी की उम्मीद?

हम बचपन से ही देखते हैं कि हमेशा छोटे ही बड़ों से माफी मांगते हैं। समाज भी ऐसी ही उम्मीद करता है। क्या कभी आपने किसी मां-बाप को अपने बच्चों से सॉरी बोलते सुना है या कभी टीचर्स को अपने स्टूडेंट्स से या किसी बॉस को अपने कर्मचारियों से। नहीं न।

माफी मांगना इसलिए भी कठिन हो जाता है क्योंकि उसके साथ एक पावर इक्वेशन जुड़ा हुआ है। हमें इस मानसिकता से ऊपर उठकर देखने और खुद को बदलने की जरूरत है। गलती करने पर माता-पिता को भी बच्चों से, बड़ों को छोटों से माफी मांगनी चाहिए ताकि बच्चे माफी की ताकत को समझ सकें।

बच्चों को यह शिक्षा मिले कि इसका उम्र, ताकत, पद, ईगो और अहंकार से कोई लेना-देना नहीं है। जब भी हमसे कोई गलती हो जाए तो बहुत सरलता और विनम्रता से हमें माफी मांग लेनी चाहिए।

और अंत में सबसे जरूरी बात। आखिर माफी मांगना हमारे शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा क्यों है। माफी मांगने से हमारे भीतर क्या बदलता है।

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