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Fortified Rice Vs Normal Rice; Benefits And Difference | PMGKAY Yojana | जरूरत की खबर- सरकार बांटेगी फ्री फोर्टिफाइड चावल: यह आम चावल से ज्यादा पौष्टिक क्यों, डाइटीशियन से जानें हर सवाल का जवाब

39 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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भारत में कुपोषण एक बड़ी समस्या है। खुद भारत सरकार का सर्वे कहता है कि हमारे यहां 5 साल से कम उम्र के 35.5% बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने गत 9 अक्टूबर को एक बड़ा फैसला लिया। सरकार ने मुफ्त में राशन देने वाली अपनी सभी योजनाओं में सामान्य चावल की जगह फोर्टिफाइड चावल वितरित करने को मंजूरी दे दी है।

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत फोर्टिफाइड चावल वितरित करने का फैसला किया है. दिसंबर, 2028 तक इस योजना पर सरकार 17,082 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

इसका मकसद लोगों में एनीमिया और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी को दूर करना है। ऐसे में सवाल उठता है कि फोर्टिफाइड चावल क्या है और यह सामान्य चावल से किस तरह अलग है।

तो आज ‘जरूरत की खबर’ में हम फोर्टिफाइड चावल के बारे में बात करेंगे। साथ ही एक्सपर्ट से इससे जुड़े तमाम सवालों के जवाब जानेंगे।

एक्सपर्ट- डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ

भारत में कुपोषण के डरावने आंकड़े

पहले तो ये जानना जरूरी है कि भारत में 74% आबादी को हेल्दी डाइट नहीं मिल पाती और 39% लोगों में पर्याप्त पोषक तत्वों की कमी है। नीचे ग्राफिक में देखें आंकड़े।

सवाल- फोर्टिफिकेशन क्या है? फूड को फोर्टिफाई करने का मतलब क्या है?

जवाब- अंग्रेजी शब्द फोर्टिफाई (Fortify) का अर्थ है, किसी चीज को मजबूती प्रदान करना, प्रोटेक्शन शील्ड बनाना। फूड को फोर्टिफाई करने से यहां हमारा आशय है, उसके पोषक तत्वों में इजाफा करना। फूड फोर्टिफिकेशन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें किसी खाद्य पदार्थ में आवश्यक विटामिन्स और मिनरल्स की मात्रा को बढ़ाया जाता है। ताकि फूड की न्यूट्रिशनल क्वालिटी में सुधार हो।

सवाल- फोर्टिफाइड चावल क्या होता है?

जवाब- चावल कई देशों में नियमित रूप से खाया जाने वाला मुख्य आहार है। हालांकि इन देशों में बड़े पैमाने पर लोगों में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी भी है। ऐसे में इन्हीं चावलों में कुछ माइक्रोन्यूट्रिएंट्स जैसेकि आयरन, फोलिक एसिड, B-कॉम्प्लेक्स विटामिन्स, विटामिन-A और जिंक को अलग से मिलाया जाता है। ये वो न्यूट्रिएंट हैं, जो हमारे शरीर की बुनियादी जरूरत हैं। यह आमतौर पर चावल में नहीं पाए जाते या प्रोसेसिंग के दौरान खत्म हो जाते हैं। इसलिए चावल को फोर्टिफाई करके उसमें अलग से जरूरी न्यूट्रिएंट्स मिलाए जाते हैं। इस तरह तैयार चावल को फोर्टिफाइड चावल कहते हैं।

सवाल- फोर्टिफाइड चावल और सामान्य चावल में क्या फर्क है?

जवाब- दोनों तरह के चावल में एक्स्ट्रा न्यूट्रिएंट्स के अलावा बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। हालांकि इसे कुछ चीजों से पहचाना जा सकता है। नीचे ग्राफिक के जरिए इस बारे में जानें।

सवाल- फोर्टिफाइड चावल कैसे तैयार किया जाता है?

जवाब- ये चावल तीन तरीकों से तैयार किया जाता है। नीचे पॉइंटर्स में इस बारे में पढ़ें।

कोटिंग के जरिए

इसके लिए सामान्य चावलों को न्यूट्रिएंट्स के लिक्विड में डुबोया जाता है। लिक्विड को चावलों के ऊपर स्प्रे भी किया जा सकता है। यह विधि केवल उन देशों में उपयोगी है, जहां के लोग खाना पकाने से पहले चावल धोते नहीं हैं।

डस्टिंग के जरिए

इस प्रक्रिया के तहत सामान्य चावलों पर न्यूट्रिएंट्स लिक्विड का छिड़काव किया जाता है। इसके बाद इसे सुखाया जाता है। इससे चावल पर एक लेयर बन जाती है। डस्टिंग द्वारा बने फोर्टिफाइड चावल को बहुत अधिक पानी से धोया या पकाया नहीं जा सकता है।

एक्सट्रूजन के जरिए

चावल के दानों को पीसकर आटा बनाया जाता है। फिर इसे न्यूट्रिएंट्स के साथ मिलाकर चावल जैसे दाने बनाने के लिए पकाया जाता है। फिर इन दानों को सामान्य चावल के साथ मिला दिया जाता है। चावल को फोर्टिफाई करने के लिए हॉट एक्सट्रूजन को सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

सवाल- भारत कितना फोर्टिफाइड चावल प्रोड्यूस करता है?

जवाब- मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन के मुताबिक साल 2018 में भारत ने 7,250 टन फोर्टिफाइड चावल का उत्पादन किया था, लेकिन वर्ष 2022 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 60,000 टन प्रति वर्ष हो गई। सरकार ने वर्ष 2019 में 11 राज्यों में फोर्टिफाइड चावल वितरित करने के लिए एक योजना शुरू की थी। मई, 2021 तक इस योजना के तहत 1.73 लाख मीट्रिक टन फोर्टिफाइड चावल वितरित किया गया। फरवरी, 2022 तक यह संख्या बढ़कर 3.64 लाख मीट्रिक टन हो गई। अब हर दिन इसका उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है।

सवाल- फोर्टिफाइड चावल को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन क्या कहती है?

जवाब- वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) फोर्टिफाइड चावल को एक महत्वपूर्ण पब्लिक हेल्थ स्ट्रेटजी की तरह देखता है। WHO के मुताबिक आज कुपोषण दुनिया में एक बड़ी समस्या है। लोगों को आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन A और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की जरूरत है। चावल को फोर्टिफाई करने की ये मुख्य वजहें हैं-

  • चावल दुनिया के एक बड़े हिस्से का मुख्य भोजन है।
  • यह आसानी से उगाया जाता है।
  • इसे स्टोर करना आसान है।
  • चावल को फोर्टिफाई करने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान है। इसलिए WHO फोर्टिफाइड चावल खाने की सलाह देता है।

सवाल- फोर्टिफाइड चावल को कैसे खाया जाता है?

जवाब- इसे सामान्य चावल की तरह ही पकाकर खाया जाता है। इसे पकाने की कोई विशेष प्रक्रिया नहीं है। यह सामान्य चावल ही है। सिर्फ इसमें कुछ एक्स्ट्रा न्यूट्रिएंट्स होते हैं।

सवाल- फोर्टिफिकेशन की प्रक्रिया में चावल में मुख्य रूप से कौन से न्यूट्रिएंट्स डाले जाते हैं?

जवाब- चावल को पौष्टिक बनाने के लिए इसमें कई विटामिन्स और मिनरल्स शामिल किए जाते हैं। नीचे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या यह सिर्फ कुपोषण का शिकार लोगों के लिए है या अन्य मध्यवर्गीय लोग भी फोर्टिफाइड चावल खा सकते हैं?

जवाब- बिल्कुल। इसे कोई भी खा सकता है। इसमें मौजूद एक्स्ट्रा न्यूट्रिएंट्स हरेक व्यक्ति के लिए फायदेमंद हैं। जो लोग गरीब नहीं हैं या जिन्हें आसानी से भोजन उपलब्ध है, उनके शरीर में भी जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।

सवाल- क्या फोर्टिफाइड चावल सामान्य चावल के मुकाबले महंगा होता है?

जवाब- फूड फोर्टिफिकेशन इनीशिएटिव (FFI) के मुताबिक फोर्टिफाइड चावल सामान्य चावल के मुकाबले थोड़ा महंगा हो सकता है, लेकिन प्राइस में ये फर्क 0.5 से 3% के बीच ही होता है। दोनों की कीमत में इतना फर्क नहीं है कि उसे अफोर्ड न किया जा सके।

सवाल- क्या फोर्टिफाइड चावल खाने से सेहत को कोई नुकसान भी हो सकता है?

जवाब- आमतौर पर इसे खाने का कोई नुकसान नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और बच्चों के लिए काम करने वाली यूएन की संस्था यूनिसेफ बच्चों के पोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए फोर्टिफाइड चावल खिलाने की सलाह देती है।

हालांकि इसका एक रिस्क फैक्टर भी है, जिसे मेडिसिन की भाषा में हाइपरविटामिलोसिस कहते हैं। यह स्थिति तब पैदा होती है, जब शरीर में विटामिन्स और न्यूट्रिएंट्स की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाए।

लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आज पूरी दुनिया में जरूरत से ज्यादा पोषण कोई समस्या नहीं है, बल्कि कुपोषण यानी शरीर की बुनियादी पोषण की जरूरतों का पूरा न हो पाना ज्यादा बड़ी समस्या है।

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