13 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी
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दंगल गर्ल फातिमा सना शेख ने हाल ही में अपनी बीमारी एपिलेप्सी (Epilepsy) यानी मिर्गी के बारे में बात की है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि दंगल फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें अपनी इस बीमारी का पता चला था। उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआत में कुछ दिन तक तो वह स्वीकार ही नहीं कर पाई थीं कि उन्हें मिर्गी जैसी बीमारी हो सकती है। इसलिए उन्होंने शुरू में इसके लिए कोई दवा नहीं ली।
उन्हें डर लगता था कि सेट पर अचानक मिर्गी का दौरा न पड़ जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि मिर्गी को लेकर लोगों में कोई जागरूकता नहीं है। लोग सोचते हैं कि जरूर इसने ड्रग्स लिया है या भूत-प्रेत से ग्रसित है।
मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है। इसमें नर्व सेल्स ठीक से सिग्नल देना बंद कर देती हैं, जिसके कारण बार-बार दौरे पड़ते हैं। दौरा पड़ने पर ब्रेन में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटीज बहुत तेज हो जाती हैं। इस दौरान शख्स की बॉडी अजीबो–गरीब तरीके से मुड़ सकती है। उसे झटके लग सकते हैं और इस दौरान उसकी कॉन्शियसनेस भी खत्म हो जाती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनिया में लगभग 5 करोड़ लोग मिर्गी से जूझ रहे हैं। भारत में लगभग एक करोड़ लोग मिर्गी का सामना कर रहे हैं। इसका मतलब है कि पूरी दुनिया के 20% मिर्गी के मरीज सिर्फ भारत में हैं।
इसलिए आज ‘सेहतनामा’ में मिर्गी के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- मिर्गी क्या है?
- मिर्गी के दौरे के ट्रिगर पॉइंट्स क्या हैं?
- यह बीमारी कब और क्यों होती है?
- किसी को मिर्गी का दौरा पड़े तो क्या कर सकते हैं?
मिर्गी क्या है?
मिर्गी एक ब्रेन डिजीज है। इसमें हमारी नर्व सेल्स की सिग्नलिंग पावर प्रभावित होती है। ऐसा ब्रेन सेल्स डैमेज होने के कारण होता है। इसके कारण ब्रेन सेल्स एब्नॉर्मल इलेक्ट्रिक सिग्नल बनाने लगती हैं, इसलिए दौरे पड़ते हैं।

मिर्गी की बीमारी क्यों होती है?
मिर्गी की बीमारी किसी को भी और कभी भी हो सकती है। डॉ. बिप्लब दास कहते हैं कि 70% मामलों में इसके पीछे के कारणों का सटीक पता नहीं लगाया जा सकता है।
हालांकि कुछ मामलों में देखा गया है कि अगर किसी के माता-पिता में से किसी एक को या दोनों को मिर्गी की समस्या है तो उसे भी मिर्गी की समस्या हो जाती है।
कुछ मामलों में देखा गया है कि सिर में चोट लगने के कारण मिर्गी के दौरे पड़ने लगते हैं। इसके और क्या कारण हो सकते हैं, ग्राफिक में देखिए:

डॉ. बिप्लब दास कहते हैं कि ब्रेन ट्यूमर, डिमेंशिया और स्ट्रोक की समस्या होने पर ब्रेन सेल्स डैमेज हो जाती हैं। इससे सिग्नलिंग प्रभावित होती है। इसलिए इन मेडिकल कंडीशन में भी मिर्गी की बीमारी हो सकती है।
मिर्गी के क्या लक्षण होते हैं?
मिर्गी के कारण आमतौर पर दौरे पड़ते हैं। इस दौरान व्यक्ति अपनी कॉन्शियसनेस खो देता है। उसके शरीर की मसल्स अनियंत्रित हो जाती हैं और शरीर में अजीबोगरीब तरीके से अकड़न हो सकती है। इस दौरान शरीर में झटके लग सकते हैं, कंपकंपी हो सकती है।
अगर मिर्गी की बीमारी माइनर है तो अस्थाई रूप से भ्रम की स्थिति बन सकती है। कई बार हो सकता है कि शख्स किसी एक जगह देर तक टकटकी लगाकर देखता रह जाए। उसे अचानक तेज गर्मी या सर्दी लग सकती है। उसके रोंगटे खड़े हो सकते हैं। जबकि मिर्गी की समस्या गंभीर होने पर दौरे पड़ते हैं और कंडीशन बहुत खराब हो सकती है।

मिर्गी के ट्रिगर पॉइंट्स क्या हैं?
डॉ. बिप्लब दास कहते हैं कि हो सकता है कि किसी शख्स को हफ्ते में एक बार मिर्गी का दौरा पड़ सकता है, जबकि दूसरे शख्स को दिन में कई बार दौरे पड़ सकते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दूसरे शख्स की लाइफस्टाइल और खानपान मिर्गी के दौरे को ट्रिगर कर देते हैं।
मिर्गी एक ब्रेन डिजीज है, इसलिए ज्यादा स्ट्रेस लेने पर यह ट्रिगर हो सकती है और दौरा पड़ सकता है। अगर ठीक से नींद नहीं पूरी हो रही है तो इससे भी मिर्गी ट्रिगर हो सकती है। इसके अलावा कई पॉइंट्स मिर्गी का दौरा ट्रिगर कर सकते हैं। ग्राफिक में देखिए:

डॉ. बिप्लब दास कहते हैं कि हर किसी के अपने अलग ट्रिगर हो सकते हैं। इसे हमें अपने अनुभव से खुद खोजना होता है। मान लीजिए अगर किसी ने जिस दिन कॉफी पी है, उस दिन उसे सामान्य से अधिक दौरे पड़ते हैं और इनमें अधिक परेशानी का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में उस शख्स के लिए कैफीन ट्रिगर पॉइंट है। इसी तरह सभी पेशेंट अपने ट्रिगर पॉइंट्स खुद खोज सकते हैं और इन्हें अवॉइड करके दौरे को कुछ हद तक कंट्रोल कर सकते हैं।
किसी को मिर्गी का दौरा पड़े तो क्या करना चाहिए?
डॉ. बिप्लब दास कहते हैं कि मिर्गी के ज्यादातर मामलों में दौरा पड़ने पर किसी इमरजेंसी मेडिकल हेल्प की जरूरत नहीं होती है। यह भी है कि अगर किसी को दौरा शुरू हो जाए तो इसे बीच में नहीं रोका जा सकता है। इसलिए जरूरी है कि इस दौरान अगर आप किसी ऐसे शख्स के पास हैं, जिसे दौरा पड़ा है तो उससे दूर भागने की बजाय पास ही रहें।
अगर दौरा हल्का है तो निम्न बातें ध्यान रखें:
- उस व्यक्ति के साथ तब तक बने रहें, जब तक उसका दौरा समाप्त नहीं होता है और वह होश में नहीं आ जाता है।
- जब उस शख्स को होश आ जाए तो उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाएं। अगर संभव है तो उसे उसके घर तक सुरक्षित पहुंचाएं।
- आप इस दौरान शांत रहें और आसपास के अन्य लोगों को भी शांत रहने को कहें।
- व्यक्ति को होश आने पर उसकी जरूरी दवाओं के बारे में पूछकर या उसके घर वालों से फोन पर बात करके दवाएं दे सकते हैं।
अगर टॉनिक-क्लोनिक दौरा पड़ा है यानी अनियंत्रित कंपन या झटके लग रहे हैं तो ये कर सकते है:
- व्यक्ति को जमीन पर आराम से लिटा दें।
- उसे सांस लेने में मदद मिल सके, इसके लिए उसे एक करवट लिटा दें।
- अगर झटके लग रहे हैं तो उसे सामान्य करने की कोशिश करें।
- किसी भी तरह की खतरनाक वस्तु को उससे दूर रख दें।
- उस शख्स के सिर के नीचे कोई मुलायम चीज रख दें।
- अगर उसने चश्मा पहन रखा है तो उसे हटा दें।
- अगर टाई पहन रखी है या कोई बहुत टाइट कपड़ा पहन रखा है, जिससे सांस लेने में दिक्कत हो सकती है तो उसे ढीला कर दें।
- अगर दौरा 5 मिनट से ज्यादा देर तक जारी रहता है तो तुरंत उसे हॉस्पिटल ले जाएं।
मिर्गी को लेकर प्रचलित मिथक और तथ्य
मिथक: मिर्गी एक पागलपन है।
तथ्य: नहीं। बाकी बीमारियों की तरह यह एक न्यूरोलॉजिकल हेल्थ कंडीशन है। न्यूरोलॉजी में इसका ट्रीटमेंट है।
मिथक: मिर्गी का दौरा पड़ने पर मोजा सुंघाना चाहिए।
तथ्य: नहीं। यह गलत और अवैज्ञानिक बात है। ऐसा कभी न करें।
मिथक: मिर्गी की बीमारी कभी ठीक नहीं होती।
तथ्य: यह सच नहीं। दवाइयों से करीब 75% मरीजों को मिर्गी के अटैक से राहत मिलती है। हालांकि इसमें दवा लेते रहना होता है।
मिथक: मिर्गी का दौरा पड़ने पर मरीज के मुंह में चम्मच डालना चाहिए।
तथ्य: नहीं। दौरा पड़ने पर मुंह में कुछ नहीं डालना चाहिए। कई बार मरीज दांतों से अपनी ही जीभ दबा लेता है। ऐसे में मरीज के मुंह में कपड़ा डाल सकते हैं। लेकिन चम्मच या कोई भी कठोर चीज कभी न डालें। ……………………….. सेहतनामा की यह खबर भी पढ़िए

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