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Emotional Eating Symptoms; Side Effects (Disorder Information) | रिलेशनशिप- क्या आप उदास होने पर ज्यादा खाते हैं: दुनिया में हर पांचवा व्यक्ति इमोशनल ईटिंग का शिकार, साइकोलॉजिस्ट के 5 सुझाव

5 मिनट पहलेलेखक: शशांक शुक्ला

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रिश्तों में तनाव, काम का दबाव और पैसों की परेशानी, ये सब हमारे इमोशंस को प्रभावित करते हैं। इनकी वजह से हम दुख महसूस करते हैं और उदास हो जाते हैं।

आप उदास होने पर क्या करते हैं?

क्या आपने कभी नोटिस किया है कि जब आप दुखी या परेशान होते हैं तो खाने की ओर भागते हैं। ऐसे में हम बिना भूख के खाते हैं। खाना हमारे लिए ऐसी चीज बन जाती है, जो तकलीफ में थोड़ा सुकून देती है। इससे भले ही कुछ देर की राहत मिल जाए, लेकिन इमोशनल ईटिंग हमारी हेल्थ के लिए गंभीर खतरा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016 में दुनियाभर में 18 साल से अधिक उम्र के 39% वयस्क मोटापे के शिकार पाए गए। इस बढ़ती समस्या के पीछे इमोशनल ईटिंग एक बड़ी वजह बनकर उभरी है। आंकड़े की बात करें तो मोटापे का शिकार हुए लोगों में 40% से 60% लोग इमोशनल ईटिंग करते हैं।

ऐसे में आज रिलेशनशिप में जानेंगे कि-

  • इमोशनल ईटिंग क्या है?
  • इसके दुष्प्रभाव क्या हैं?
  • इससे कैसे बचें या छुटकारा पाएं?

इमोशनल ईटिंग क्या है?

जब आप नकारात्मक भावनाओं से परेशान होते हैं, तो खाने की क्रेविंग होती है। इस स्थिति में बिना भूख के खाने की इच्छा होती है। हम स्ट्रेस से छुटकारा पाने के चक्कर में खा लेते हैं तो इसे ही इमोशनल ईटिंग कहा जाता है।

इस स्थिति में हैवी कैलोरी और कार्ब वाले फास्ट फूड खाने की इच्छा होती है, जो हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक है।

इमोशनल ईटिंग की पहचान कैसे करें?

जब बिना भूख के भी खाने का मन करे तो यह इमोशनल ईटिंग का संकेत हो सकता है। आमतौर पर जब लोग तनाव, उदासी या अकेलापन महसूस करते हैं तो अधिक खाते हैं।

इमोशनल ईटिंग से पीड़ित व्यक्ति बिना भूख के ओवरईटिंग करता है। लेकिन बाद में उसे इस बात का पछतावा होता है और वह बुरा महसूस करता है। आइए इमोशनल ईटिंग के लक्षणों को ग्राफिक के जरिए समझते हैं।

इमोशनल ईटिंग के दुष्प्रभाव क्या हैं?

साल 2021 में साइंस डायरेक्ट पर पब्लिश्ड एक रिसर्च के मुताबिक, जो लोग तात्कालिक संतुष्टि पर नियंत्रण नहीं रखते हैं, उनके इमोशनल ईटिंग की संभावना 18% अधिक होती है। इमोशनल ईटिंग हमारे दिमाग के लैट्रल हाइपोथैलमस (LH) में बदलाव ला सकता है।

लैट्रल हाइपोथैलमस दिमाग का वह हिस्सा है, जो भूख, प्यास, नींद और हॉर्मोन को नियंत्रित करता है। इसमें बदलाव की वजह से हम शुगर और फैट वाले खाने की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। यह हमारे ब्रेन के रिवॉर्ड सिस्टम को भी प्रभावित कर सकता है।

बढ़ते वजन की समस्या

इमोशनल ईटिंग के दौरान हम अधिक कैलोरी लेते हैं। इससे वजन बढ़ सकता है और लगातार बढ़ते वजन से मोटापा हो सकता है।

डायबिटीज का खतरा

अत्यधिक चीनी, वसा और अनहेल्दी फूड्स का सेवन शरीर के इंसुलिन स्तर को प्रभावित कर सकता है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

मेंटल हेल्थ को नुकसान

इमोशनल ईटिंग से व्यक्ति को थोड़ी देर के लिए मानसिक शांति मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में यह डिप्रेशन और एंग्जाइटी की समस्या पैदा कर सकता है।

ईटिंग डिसऑर्डर

इमोशनल ईटिंग की आदत समय के साथ अधिक गंभीर हो सकती है। व्यक्ति ब्यूलीमिया से पीड़ित हो सकता है। इसमें व्यक्ति अधिक खाना खाने के बाद उसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए उल्टी करता है। यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

पाचन समस्याएं

अत्यधिक खाना खाने से पाचन प्रणाली पर दबाव पड़ता है, जिससे गैस, अपच, कब्ज और अन्य पाचन समस्याएं हो सकती हैं।

ऊर्जा की कमी और थकावट

खराब आहार से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिलते हैं। इससे थकान, कमजोरी और सुस्ती महसूस हो सकती है।

सेल्फ-रिस्पेक्ट का नुकसान

इमोशनल ईटिंग से व्यक्ति का आत्म-सम्मान कम हो सकता है और यह सामाजिक रिश्तों में भी समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। व्यक्ति खुद को लेकर असुरक्षित महसूस कर सकता है और उसे अपने वजन या आहार के बारे में शर्मिंदगी हो सकती है।

गंभीर बीमारियां होने का खतरा

इमोशनल ईटिंग के कारण फैट और शुगर वाले फूड्स अधिक खाने से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्राल की समस्या को जन्म दे सकता है।

इमोशनल ईटिंग से छुटकारा पाने के तरीकेइमोशनल ईटिंग से बचने के लिए आप विभिन्न तरीके अपना सकते हैं। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक आदत है। ऐसे में यह बीमारी का रूप ले, इससे पहले अपनी आदतों में सुधार कर सकते हैें।

तनाव से निपटें – व्यायाम, योग और ध्यान के जरिए नकारात्मक भावनाओं को कम किया जा सकता है। इससे आपको इमोशनल ईटिंग पर काबू पाने में मदद मिल सकती है।

माइंडफुल ईटिंग अपनाएं – खाने को धीरे-धीरे चबाकर खाएं। यह ध्यान दें कि आप भूखे हैं या नहीं और हर निवाले का स्वाद लें। इससे आप अधिक खाने से बच सकते हैं।

हेल्दी फूड का विकल्प रखें – घर में मीठे और फैटी फूड की संख्या सीमित करें। इसके बजाय, फ्रिज में ताजे फल और सब्जियां रखें, ताकि जब भी आपको भूख लगे, आप हेल्दी स्नैक खा सकें।

एक्सपर्ट्स की मदद लें – अगर आपको लगता है कि आप इसे अकेले नहीं कर पा रहे, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट और डाइटिशियन की मदद ले सकते हैं।

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