12 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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बीते 8 नवंबर को दिल्ली के रोहिणी, सेक्टर 27 में एक दुखद घटना हुई। एक परिवार अपने इकलौते बेटे को घर में अकेला छोड़कर छठ पर्व मनाने घाट पर गया था। बच्चा बंद घर में अकेला था। पीछे घर में आग लग गई और 5 साल के मासूम की मौत हो गई।
ऐसी ही एक घटना वर्ष 2021 में साउथ-वेस्ट लंदन के शहर सटन (Sutton) हुई थी। यहां एक मां अपने चार बच्चों को घर में छोड़कर शॉपिंग के लिए मार्केट चली गई थी। पीछे से घर में अचानक आग लग गई, जिससे चारों बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई।
आए दिन ऐसी कई घटनाएं सामने आती हैं, जिसमें बच्चों को घर पर अकेला छोड़कर पेरेंट्स घर से बाहर चले जाते हैं और कोई दुर्घटना हो जाती है।
इसलिए आज रिलेशनशिप कॉलम में हम बच्चों की सेफ्टी के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- बच्चों को घर पर अकेला छोड़ते समय किन बातों का ख्याल रखना चाहिए?
- कितने साल तक के बच्चों को घर पर अकेला नहीं छोड़ना चाहिए?
क्या बच्चों को घर पर अकेला छोड़ना सुरक्षित है?
12 साल से कम उम्र के बच्चों को घर पर अकेला नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि इससे कम उम्र के ज्यादातर बच्चों में अकेले होने पर इमरजेंसी का सामना करने की मैच्योरिटी नहीं होती है। इसके लिए बच्चे की समझदारी बढ़ने के साथ उसे घर के डेंजर्स पॉइंट्स के बारे में जरूर बताएं। ताकि पेरेंट्स के आसपास न रहने पर भी बच्चे खुद से सावधानियां बरत सकें।
बच्चों को घर पर अकेला छोड़ने से पहले करें विचार
बच्चे को घर पर अकेले छोड़ने का फैसला लेते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसेकि–
- बच्चे की उम्र और मैच्योरिटी
- आसपास का सपोर्ट नेटवर्क
- क्या किसी क्राइसिस की स्थिति में बच्चा तुरंत किसी को बुला सकता है
- आप घर से कितनी दूर और कितनी देर के लिए जा रहे हैं
इसके अलावा डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें-

बच्चों को घर पर अकेला छोड़ने से पहले इन बातों का रखें ख्याल
काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. अदिति सक्सेना बताती हैं कि अगर आप अपने 12 साल से बड़े बच्चे को भी घर पर अकेला छोड़ना चाह रहे हैं तो इससे पहले कुछ बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है।
जैसेकि क्या आपके आसपास ऐसे पड़ोसी हैं, जिन पर आप भरोसा कर सकते हैं कि वे इमरजेंसी में आपके बच्चे की मदद करेंगे? क्या आप बहुत व्यस्त सड़क के आसपास रहते हैं या यह एक शांत इलाका है? क्या आपके पड़ोस में या उसके आसपास बहुत ज्यादा क्राइम होते हैं? इन बातों को ध्यान में रखकर ही अपने बच्चे को घर पर अकेला छोड़ने का निर्णय लें।
इस स्थिति से निपटने के लिए अपने बच्चे को भी तैयार करें। उसे हर उस चीज के बारे में बताएं, जो आपके न रहने पर उसे घर में जरूरत पड़ सकती है। नीचे ग्राफिक में इस बारे में देखिए-

कैसे जानें कि बच्चा जिम्मेदारी के लिए तैयार है?
यह तय करते समय कि आपका बच्चा जिम्मेदारी के लिए तैयार है या नहीं, उसके स्किल के बारे में सोचें। बच्चे की दिनचर्या में कुछ चीजों को नोटिस करके उसके जिम्मेदार होने का अनुमान लगाया जा सकता है। इसे नीचे पॉइंटर्स से समझिए।
- वह घर के कामों में हाथ बंटाता है।
- वह कामों के नतीजे के बारे में सोच सकता है।
- वह अपने आसपास के लोगों को समझता है।
- वह अपनी गलतियों को स्वीकार करता है।
- वह अपने कार्यों के लिए जिम्मेदारी लेता है।
- वह अपने कामों को समय पर पूरा करता है।
- वह समस्याओं काे हल करने में विश्वास करता है।
- वह घर के डेंजर एरिया के बारे में जानता है।
बच्चों को इन परिस्थितियों से निपटने के बारे में दें जानकारी
कभी-कभी अचानक कोई ऐसी स्थिति बन जाती है, जिससे निपटने के लिए तुरंत निर्णय लेना जरूरी होता है। ऐसे में अपने बच्चों को इमरजेंसी कंडीशन से निपटने के बारे में जरूर बताएं। ये कंडीशंस कई तरह की हो सकती हैं। जैसेकि-
- रसोई में छोटी सी आग लग जाए तो…
- मौसम ज्यादा खराब हो तो…
- जब कोई अजनबी दरवाजे पर आ जाए तो…
- कोई व्यक्ति माता-पिता को बुलाए, जो घर पर नहीं हैं ताे…
- बिजली गुल हो जाए तो…
बच्चे को घर पर अकेला छोड़ने से पहले ट्रायल जरूरी
डॉ. अदिति सक्सेना बताती हैं कि भले ही हमें अपने बच्चे की मैच्योरिटी पर भरोसा हो, लेकिन उसे अकेला छोड़ने से पहले कुछ प्रैक्टिस रन या ट्रायल करने में समझदारी है। सबसे पहले अपने बच्चे को आधे घंटे से एक घंटे तक घर पर अकेले रहने दें। इस दौरान आप ऐसी जगह पर जाएं, जहां से कम समय में उसके पास पहुंच सकें।
वापस लौटकर बच्चे से ये सवाल पूछें-
- बिना एडल्ट सुपरविजन अकेले रहना कैसा लगा?
- क्या तुम्हें अकेले डर लगा?
- क्या दरवाजे की कॉलबेल बजने पर तुमने सीधे दरवाजा खोला या पहले सेफ्टी विंडो से चेक किया कि कौन आया है?
- क्या तुमने किचन में गैस या माइक्रोवेव का इस्तेमाल किया?
- क्या इस्तेमाल करने के बाद उन चीजों को जिम्मेदारी के साथ बंद किया?
- क्या तुम्हें लगता है कि तुम घर एक-दो-चार घंटे अकेले रह सकते हो?
- क्या तुम इस जिम्मेदारी के लिए तैयार हो?
- इस दौरान हमसे गलतियां भी हो सकती हैं। क्या तुम अपनी किसी गलती को आइडेंटिफाई कर सकते हो। जैसेकि गीजर ऑन करके छोड़ देना?
- क्या हमारी (पेरेंट्स) तरफ से किसी सुधार या बदलाव की जरूरत है? क्या हम तुम्हारे अकेले घर में रहने को ज्यादा सेफ बना सकते हैं?
बच्चे से इस तरह का संवाद खुद बच्चों को जिम्मेदार होने और जिम्मेदार ढंग से फैसले लेने के लिए प्रेरित करता है। बच्चों को ऐसा नहीं लगता कि उन्हें किसी के आदेश का पालन करना है। वे सीखते हैं कि समझदारी से रहना उनकी खुद की जिम्मेदारी है। इस तरह बच्चों में परिपक्वता आती है।

घर से बाहर जाने पर बच्चों के लिए बनाएं कुछ नियम
जब आप घर से बाहर हों तो बच्चों के लिए कुछ नियम तय करें और सुनिश्चित करें कि बच्चा इन्हें फॉलो करे। जैसेकि-
- घर पर किसी दोस्त को नहीं बुलाना है।
- टीवी देखने का समय निश्चित है।
- रसोई में जाना या खाना नहीं पकाना है।
- अजनबियों के लिए दरवाजा नहीं खोलना है।
- किसी अजनबी का फोन आए तो उससे बात नहीं करनी है।
- भाई–बहनों के साथ झगड़ा नहीं करना है। घर में जिम्मेदारी से रहना है।
इन चीजों को बच्चों की पहुंच से रखें दूर
बच्चों को घर पर अकेला छोड़ने से पहले घर को उनके लिए सुरक्षित बनाना जरूरी है। चाहे आपका बच्चा नियमों का कितना भी पालन क्यों न करे। ऐसी कोई भी चीज बच्चों की पहुंच से दूर रखें, जो स्वास्थ्य या सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।





