Have a great article or blog to share?

CPR Process Steps Explained; What It Is | How To Perform | सेहतनामा- अचानक किसी को कार्डियक अरेस्ट हो तो CPR दें: बच सकती है जान, CPR क्या है, डॉक्टर से जानें हर सवाल का जवाब

9 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

इस भागदौड़ भरी जिंदगी, तेजी से बदलती लाइफस्टाइल और खानपान की गलत आदतों ने कई बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। इन्हीं में से एक बीमारी है कार्डियक अरेस्ट। पिछले कुछ सालों में कार्डियक अरेस्ट के केस इतने बढ़े हैं कि लोगों के मन में एक डर पैदा हो गया है। चिंता की बात ये है कि अच्छे-खासे नौजवान भी इसका शिकार हो रहे हैं।

हमने सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियोज देखे हैं, जिनमें डांस करते या जिम में वर्कआउट करते हुए किसी युवा की अचानक कार्डियक अरेस्ट से मृत्यु हो जाती है।

हालांकि एक ऐसा तरीका है, जिसे तुरंत करने पर कार्डियक अरेस्ट के मरीज को बचाने की संभावना बढ़ जाती है। मेडिसिन की भाषा में इसे कहते हैं सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (Cardiopulmonary resuscitation)।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के ‘हार्ट एंड स्ट्रोक स्टैटिस्टिक्स 2022’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्डियक अरेस्ट एक पब्लिक हेल्थ क्राइसिस है। अमेरिका में हर साल 356,000 से ज्यादा आउट ऑफ हॉस्पिटल कार्डियक अरेस्ट होते हैं, जिनमें से लगभग 90% घातक होते हैं। हैरानी की बात तो ये है कि अमेरिका में हर साल 23,000 से अधिक बच्चे और युवा इसका शिकार हो रहे हैं।

प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल ‘दे लैसेंट’ के मुताबिक भारत में हर साल लगभग 5-6 लाख लोग अचानक हुए कार्डियक अरेस्ट (SCD) के कारण दम तोड़ देते हैं और उनमें से बड़ी संख्या 50 वर्ष या उससे कम आयु के लोगों की होती है।

तो आज ‘सेहतनामा’ में हम आपको CPR के बारे में विस्तार से बताएंगे, साथ ही जानेंगे कि-

  • सीपीआर देने की सही प्रक्रिया क्या है?
  • क्या इससे जान बचाई जा सकती है?
  • सीपीआर शरीर में कैसे काम करता है?

सीपीआर के बारे में हर किसी को जानना जरूरी है, जिससे कोई भी व्यक्ति कार्डियक अरेस्ट के मरीज को प्राथमिक उपचार दे सके। इस बारे में हमने मेदांता हॉस्पिटल लखनऊ के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जन डॉक्टर गौरांग मजूमदार से बातचीत की और उन्होंने इससे जुड़े सभी सवालों के जवा​ब दिए।

सवाल: सीपीआर क्या है?

जवाब: सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन एक ऐसी इमरजेंसी लाइफ सेविंग प्रोसिजर है, जो तब की जाती है, जब हृदय की धड़कन रुक जाती है। सीपीआर किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट से बचने में मदद कर सकता है। भले ही आपको सीपीआर देना न आता हो, आप सिर्फ अपने हाथों का इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति की मदद कर सकते हैं। इसके लिए आपको तुरंत एक्शन लेने की जरूरत है।

सवाल: सीपीआर शरीर के अंदर कैसे काम करता है?

जवाब: हार्ट का काम पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन मेनटेन करना है। ये मेकैनिकली मस्कुलर पंप है, जो हर मिनट में 60 से 70 बार पंप करके पूरी बॉडी में प्रेशर के साथ खून पहुंचाता है। ब्लड में ऑक्सीजन व न्यूट्रिशन होता है और जिंदा रहने के लिए शरीर की प्रत्येक कोशिका को ब्लड के जरिए ऑक्सीजन और न्यूट्रिशन की जरूरत होती है।

इन सभी कोशिकाओं में ऑक्सीजन और न्यूट्रिशन पहुंचाने का काम ब्लड करता है। उस ब्लड को पूरे सभी सेल्स में भेजने का काम सेंट्रल पंप यानी हार्ट करता है। इसे हार्ट पंपिंग फंक्शन कहते हैं।

अगर एक बार बॉडी में हर जगह ब्लड चला गया तो फिर उस ब्लड से ऑक्सीजन और न्यूट्रिशन निकल जाता है, जिसके बाद वह ब्लड ब्लैक हो जाता है। उसे दोबारा ऑक्सीजन देकर रेड करने के लिए वही ब्लड लंग्स में जाता है तो जैसे ही व्यक्ति सांस लेता है, वह ब्लैक ब्लड रेड हो जाता है। कुल मिलाकर ये समझें कि व्यक्ति को जिंदा रखने के लिए हार्ट और लंग्स मिलकर एक यूनिट की तरह काम करते हैं। सीपीआर में पहला शब्द है ‘कार्डियक’ यानी हार्ट। दूसरा है ‘पल्मोनरी’ मतलब लंग्स। ये दोनों ही जीवन जीने के लिए बहुत जरूरी हैं।

किसी वजह से मान लीजिए कि हार्ट ने पंप करना बंद कर दिया तो बॉडी में ब्लड ही नहीं जाएगा और जब ब्लड सर्कुलेट नहीं होगा तो ऑक्सीजन और न्यूट्रिशन कौन पहुंचाएगा। वैसे तो हर ऑर्गन के लिए ऑक्सीजन बहुत जरूरी है, लेकिन इसमें सबसे महत्वपूर्ण चीज है ब्रेन, जो कि बेहद सेंसिटिव अंग है।

अगर ब्रेन को ब्लड नहीं मिलेगा तो व्यक्ति परमानेंट कोमा में चला जाएगा। हार्ट बंद होने के बाद ब्रेन सबसे पहले डेड होता है। ऐसे में ब्रेन को जिंदा रखने के लिए हमें हार्ट को तुरंत चालू करना होगा, लेकिन हार्ट तो बंद हो गया है। ऐसे में हमें मेकैनिकली हार्ट को चलाना पड़ेगा।

इसके लिए हम हार्ट को एक्सटरनल कंप्रेशन देते हैं यानी हाथ से सीने को दबाते हैं। इससे हार्ट के अंदर जो ब्लड है, वह पूरे शरीर में जाएगा, कुछ फेफड़े में भी जाएगा। लेकिन अगर कार्डियक अरेस्ट हो गया है तो फेफड़े भी काम नहीं करेंगे तो व्यक्ति को माउथ-टू-माउथ फूंक के जरिए ऑक्सीजन देना होगा।

चार या पांच बार सीने पर कंप्रेशन देना है और एक बार फूंक मारना है। कंप्रेशन करने से ब्लड पूरे शरीर में जाएगा और उस ब्लड को हम अपना ऑक्सीजन दे ही रहे हैं।​ इस प्रक्रिया को लगातार तब तक ​करना है, जब तक कि हार्ट काम न करने लगे।

सवाल: कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में क्या अंतर है?

जवाब: कार्डियक अरेस्ट का मतलब है हार्ट खून को पंप करके फेंक नहीं पा रहा है। हार्ट के पंप करने से पूरी बॉडी में ब्लड जाता है और एक बार हार्ट के पंप करने से 60 से 70 ML खून पूरी बॉडी में जाता है। इसे इजेक्शन कहते हैं। हार्ट जब इजेक्ट करना बंद कर देता है तो उसे कार्डियक अरेस्ट कहते हैं।

हार्ट अटैक का मतलब है, हृदय को खून सप्लाई करने वाली नली में ब्लॉकेज होना। अचानक नली ब्लॉक होने से हार्ट की मसल्स को खून नहीं मिलता और वह मसल्स डैमेज हो जाती हैं। इसे हार्ट अटैक कहते हैं। हार्ट अटैक का मतलब अरेस्ट नहीं है, लेकिन हार्ट अटैक में अरेस्ट हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है।

सवाल: क्या हार्ट अटैक में भी CPR दिया जा सकता है?

जवाब: नहीं, सीपीआर सिर्फ कार्डियक अरेस्ट में देना होता है। हार्ट अटैक के लिए सीपीआर नहीं देना होता है क्योंकि हमारा ब्लड प्रेशर मेनटेन हो रहा है, हार्ट बीट चल रही है, तब भी हार्ट अटैक हो जाता है।

सवाल: तो कैसे पता चलेगा कि कार्डियक अरेस्ट हुआ है?

जवाब: हार्ट अटैक होने से पेशेंट बताएगा कि दर्द हो रहा है, पसीना आ रहा है तो उसे तुरंत हॉस्पिटल ले जाइए, लेकिन कार्डियक अरेस्ट में पेशेंट तुरंत उसी जगह पर ही गिर जाएगा, बेहोश हो जाएगा। ऐसी स्थिति में मरीज को फ्लैट जगह पर लिटाकर तुरंत सीपीआर देना चाहिए। सीपीआर गलत देने से कुछ नहीं होगा, लेकिन न देने से जरूर फर्क पड़ेगा।

सवाल: अरेस्ट के कितनी देर बाद तक सीपीआर देने के चांस रहते हैं?

जवाब: बेहोश होने के तीन मिनट के अंदर सीपीआर देना शुरू कर देना चाहिए। अगर इससे लेट हो गया तो ब्रेन डेड हो जाता है। तीन मिनट के बाद सीपीआर देने से अगर हार्ट वापस काम भी करने लगा तो भी व्यक्ति कोमा में चला जाएगा। उसका कोई फायदा नहीं है। इसलिए जितनी जल्दी सीपीआर दिया जाएगा, उतनी ही बेहतर रिकवरी होगी।

सवाल: क्या डॉक्टर्स भी सीपीआर देते हैं?

जवाब: डॉक्टर गौरांग मजूमदार कहते हैं कि डॉक्टर्स भी हॉस्पिटल में सीपीआर देते हैं। इससे 60 से 70% रिकवरी हो जाती है, लेकिन रोड साइड सीपीआर में 50% अधिक स्ट्रगल होता है क्योंकि लोगों को इसकी परफेक्ट जानकारी नहीं होती है।

​सवाल: सीपीआर कितनी देर तक देना होता है?

जवाब: जब तक कि हार्ट फिर से काम न करने लगे। सीपीआर से आप व्यक्ति को लगभग 2 घंटे तक जिंदा रख सकते हैं।

खबरें और भी हैं…

Source link

Share it :

Leave a Reply

Your email address will not be published.