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Bhai Dooj 2024 understand menstruation, Period literacy | सेहतनामा- डियर सिस्टर, अपने बारे में जानिए: पीरियड लिटरेसी जरूरी, बेसिक हाइजीन और अवेयरनेस से खूबसूरत बनेगी जिंदगी

59 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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3 नवंबर को पूरे देश में भाई दूज मनाई जाएगी। यह दिन भाइयों के लिए जितना खास होता है, उतना ही बहनों के लिए भी होता है। हमारी संस्कृति में रक्षाबंधन और भाई दूज जैसे कई पर्व हैं, जो हर साल भाई-बहन के रिश्ते की डोर में एक और धागा जोड़कर इसे कुछ और मजबूत कर देते हैं।

इन सभी चीजों के बीच एक बात जो अक्सर छूट जाती है, वह ये है कि पुरुषों को अपने जीवन से जुड़ी महिलाओं के स्वास्थ्य के बारे में न के बराबर जानकारी और जागरुकता है।

इससे भी बड़ी बात ये है कि खुद महिलाओं को अपने स्वास्थ्य और शरीर के बारे में बहुत कम जानकारी होती है। इसे लेकर समाज में इतनी असहजता है कि महिला और पुरुष तो छोड़िए, एक महिला-दूसरी महिला से अपने शरीर और स्वास्थ्य के बारे में खुलकर बात नहीं कर पाती है।

इसके चलते पूरी दुनिया में हर साल न जाने कितनी मौतें हो जाती हैं। पीरियड्स को लेकर शर्म और कम जानकारी के कारण एनीमिया हो जाता है, वेजाइनल इन्फेक्शन होते हैं, यूट्रस इन्फेक्शन होते हैं, कई बार तो यह कैंसर में भी बदल जाता है।

इसलिए आज का ‘सेहतनामा’ सभी भाई-बहनों के लिए एक तोहफा है। इसमें हम पीरियड्स के बारे में बेसिक बातें जानेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • क्यों हमें महिलाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए?
  • महिलाओं के किन शारीरिक बदलावों पर डॉक्टर से मिलने की जरूरत है?
  • पीरियड्स कब चिंता का विषय हो सकते हैं?

पीरियड्स के बारे में अवेयरनेस जरूरी

तारीख थी 27 मार्च, 2024। मुंबई में एक 14 साल की लड़की ने सुसाइड कर ली। उसे पहली बार पीरियड्स हुए थे और इसके बारे में कुछ पता नहीं था। उसके लिए यह सबकुछ शरीर से अचानक खून रिसने जैसा था। लड़की को इस बात से सदमा लगा और उसने सुसाइड कर ली। देश में ऐसी कई लड़कियां अपने पहले पीरियड पर न जाने कितने डरावने खयालों से गुजरती हैं।

हमारे देश में पीरियड्स को लेकर इतनी कम जागरुकता है कि यह अभी तक शर्म का विषय बना हुआ है। महिलाओं को अपने पीरियड्स स्टेन छिपाने पड़ते हैं। सिनेटरी पैड्स को अपने भाई और पिता की नजरों से छिपाकर रखना होता है। इस शर्म के कारण ही वे जिंदगी भर अपने शरीर के बारे में नहीं जान पाती हैं।

57% महिलाएं अपने शरीर के बारे में नहीं जानती

यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड का एक सर्वे कहता है कि भारत जैसे विकासशील देशों की 57% महिलाओं को अपने शरीर के बारे में बेसिक जानकारी भी नहीं है।

ग्राफिक में देखिए:

सुप्रीम कोर्ट के जज ने उठाया पीरियड्स लिटरेसी का मुद्दा

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संजय करोल ने एक महिला की तस्वीर शेयर करके बताया कि उस महिला को पीरियड्स के समय 5 दिन अपने घर से बाहर टेंट में गुजारने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा देश सिर्फ दिल्ली और मुंबई तक सीमित नहीं है। देश के कई इलाकों में अभी भी पीरियड्स को लेकर बहुत कम जागरूकता है। इसके कारण महिलाओं को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए पीरियड्स लिटरेसी बहुत जरूरी है।

पीरियड्स क्या है

पीरियड्स मेंस्ट्रुअल साइकल यानी मासिक धर्म चक्र का वह हिस्सा है, जब महिला की वेजाइना से कुछ दिन तक ब्लीडिंग होती है। ज्यादातर महिलाओं को यह 28 दिनों के अंतराल पर होता है। हालांकि कुछ महिलाओं के लिए यह अंतर अलग हो सकता है, 21 दिन से 35 दिन के अंतराल पर पीरियड होना भी आम है।

हमारे समाज के लोग पीरियड्स को अपवित्र मानते हैं, जबकि यह किसी महिला की मातृत्व शक्ति का प्रतीक है। पीरियड्स होने का मतलब है कि कोई स्त्री मां बन सकती है। इससे भी जरूरी बात ये है कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को ज्यादा हाइजीन, ज्यादा केयर और ज्यादा सपोर्ट की जरूरत होती हैं। वेजाइनल ब्लीडिंग के कारण उन्हें इन्फेक्शन होने का जोखिम रहता है। इसके अलावा हॉर्मोनल बदलाव के कारण उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

पीरियड्स के दौरान महिलाओं को एक्स्ट्रा केयर और सपोर्ट चाहिए

मौजूदा वक्त में दुनिया के कई देशों में पीरियड्स के दौरान छुट्टी मिलती है। यह छुट्टी इसलिए दी जाती है क्योंकि महिलाओं के लिए पीरियड्स के दिन अन्य दिनों से बहुत अलग होते हैं। इस दौरान वे दर्द, मूड चेंजेज और सिरदर्द जैसी समस्याओं से गुजरती हैं। उन्हें ठीक ढंग से नींद तक नहीं आती है। इस दौरान उन्हें बहुत फिजिकल और मेंटल सपोर्ट की जरूरत होती है। हमें बदलाव के तौर पर ऑफिस में महिला कुलीग, घर पर मां, बहन और पत्नी के लिए सपोर्ट सिस्टम बनाना चहिए।

आइए ग्राफिक में देखते हैं कि महिलाओं को पीरियड्स के दौरान किस तरह की समस्याएं होती हैं।

पीरियड्स में इन अनियमितताओं पर डॉक्टर से मिलना जरूरी

महिलाओं को प्रकृति ने सृजन का वरदान दिया है। पीरियड्स इसका ही एक हिस्सा हैं। हालांकि ये कई बार जागरुकता और जानकारी के अभाव में अभिशाप बन सकता है। इसके कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

खासतौर पर पीरियड्स में अनियमितता होने पर बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है।

कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ग्राफिक में देखिए:

डॉ. मीनाक्षी बंसल कहती हैं कि इसके अलावा भी कुछ ऐसी सिचुएशन बन सकती हैं, जब पीरियड्स चिंता का विषय हो सकते हैं। अगर आपके साथ नीचे दिए पॉइंट्स में से कोई समस्या है तो डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है।

  • अगर 16 वर्ष की उम्र तक पहला पीरियड नहीं हुआ है।
  • टैम्पोन का इस्तेमाल करने के बाद आप बीमार महसूस करती हैं।
  • बर्थ कंट्रोल पिल्स बंद करने के 3 महीने के भीतर पीरियड शुरू नहीं हुए हैं।
  • अगर पीरियड्स की डेट नजदीक आने पर आप घबराने लगती हैं या असहज हो जाती हैं।

…………………………… सेहत से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए सेहतनामा- बर्थ कंट्रोल पिल्स मददगार, पर घातक भी: डॉक्टर से जानिए पिल्स लेने का सही तरीका

भारत समेत दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में बर्थ कंट्रोल पिल्स ओवर द काउंटर मिल जाती हैं। इसके लिए डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन की जरूरत नहीं होती है। अगर इन्हें रोज सही समय पर लिया जा रहा है तो ये प्रेग्नेंसी रोकने में 99% तक प्रभावी होती हैं। लेकिन इनके साइड इफेक्ट्स भी बहुत ज्यादा हैं। पूरी खबर पढ़िए…

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