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Baba Siddique Murder; Bone Ossification Test (Haddi Teeth) Explained | जरूरत की खबर- क्या है बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट: बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के आरोपी का हुआ टेस्ट, हड्डियों-दांतों से कैसे पता चलती उम्र

33 मिनट पहलेलेखक: संदीप सिंह

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मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित गुट) के नेता और पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की 12 अक्टूबर की रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें एक आरोपी धर्मराज कश्यप ने खुद को नाबालिग बताया था। वहीं पुलिस ने कहा कि आधार कार्ड की जन्मतिथि के मुताबिक, वह वारदात के समय बालिग था।

मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसकी जांच के लिए आरोपी का बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट कराने का आदेश दिया था। टेस्ट रिपोर्ट के बाद यह कन्फर्म हुआ कि आरोपी धर्मराज नाबालिग नहीं है। भारतीय कानून में नाबालिग और बालिग आरोपियों के लिए अलग-अलग सजा का प्रावधान है। ऐसे में किसी की उम्र को लेकर जरा भी संदेह पूरी कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

इसलिए आज जरूरत की खबर में बात करेंगे कि आरोपी की उम्र कैसे तय होती है। साथ ही जानेंगे कि-

  • बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट क्या होता है?
  • क्या हड्डियों या दांतों से किसी की उम्र पता की जा सकती है?

एक्सपर्ट:

डॉ. प्रशान्त निरंजन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, राजकीय मेडिकल कॉलेज जालौन (उत्तर प्रदेश)

रूद्र विक्रम सिंह, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट

सवाल- किसी आरोपी या पीड़ित की उम्र की जांच कैसे की जाती है?

जवाब- एडवोकेट रूद्र विक्रम सिंह कहते हैं कि भारत में किसी आरोपी या पीड़ित की उम्र जानने का पहला और विश्वसनीय सर्टिफिकेट उसका जन्म प्रमाण पत्र है। चूंकि आज भी बहुत सारे लोगों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है। ऐसे में उनके पहचान पत्र के मुताबिक जन्मतिथि को ही सही माना जाता है। अगर पहचान पत्र में लिखी जन्मतिथि को लेकर कोई आपत्ति या संदेह होता है तो कोर्ट के आदेश के बाद आरोपी या पीड़ित का मेडिकल टेस्ट कराया जाता है।

नीचे दिए ग्राफिक से इसे समझिए।

सवाल- दांतों के जरिए किसी की सही उम्र कैसे बताई जा सकती है?

जवाब- डॉ. प्रशान्त निरंजन बताते हैं कि मुंह में दांत देखकर भी किसी की उम्र का पता लगाया जा सकता है। उदाहरण के लिए अगर किसी के मुंह में दूध का एक भी दांत है तो उसकी उम्र 14 साल से कम है। जिसके मुंह में दाढ़ आ गई है, वह 18 साल के करीब है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ दांतों की संख्या (अधिकतम 32) भी बढ़ती है। हमारे दांत 1400 डिग्री टेम्परेचर में भी खराब नहीं होते हैं। ऐसे में शरीर के कंकाल होने के बाद भी दांतों के जरिए उम्र का अनुमान लगाया जा सकता है।

सवाल- DNA जांच के जरिए किसी की उम्र कैसे पता की जा सकती है?

जवाब- डॉ. प्रशान्त निरंजन कहते हैं कि DNA जांच से भी उम्र का पता लगाया जा सकता है। इसे DNA मेथिलेशन प्रोसेस (DNA Methylation Process) कहते हैं। दरअसल उम्र के साथ DNA से मिथाइल समूह टैग चिपक जाते हैं। इनके पैटर्न के मुताबिक किसी की अनुमानित उम्र का पता लगाया जा सकता है। पुलिस कंकाल हो चुकी बॉडी के ज्यादातर मामलों में उम्र की जांच के लिए यही टेस्ट कराती है।

सवाल- बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट क्या होता है?

जवाब- यह किसी व्यक्ति की सही उम्र पता लगाने का एक तरीका है, जो आमतौर पर कानूनी पेंच फंसने पर इस्तेमाल होता है। इसमें शरीर की कुछ खास हड्डियों का टेस्ट किया जाता है।

नीचे दिए ग्राफिक से समझिए कि बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट क्या है।

सवाल- पुलिस बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट कब कराती है?

जवाब- एडवोकेट रूद्र विक्रम सिंह बताते हैं कि आमतौर पर इस टेस्ट का इस्तेमाल फोरेंसिक और कानूनी कार्रवाई में किसी पीड़ित या आरोपी की सटीक उम्र का पता लगाने के लिए किया जाता है। जब किसी आरोपी की उम्र को लेकर संदेह होता है तो पुलिस बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट कराती है। इससे यह पता लगाया जाता है कि आरोपी बालिग है या नाबालिग है। इसके अलावा पीड़ित की सही उम्र का पता लगाने के लिए भी पुलिस यह टेस्ट कराती है। उदाहरण के लिए अगर किसी नाबालिग के साथ यौन शोषण हुआ है तो आरोपी पर POCSO (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) के तहत कार्रवाई की जाएगी।

राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की सही उम्र का पता लगाने के लिए भी बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट होता है, जिससे किसी टूर्नामेंट में निधार्रित उम्र से ज्यादा का खिलाड़ी न खेल सके। यह जांच किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं, बल्कि मेडिकल बोर्ड द्वारा की जाती है।

सवाल- नाबालिग आरोपी के खिलाफ क्या कानूनी प्रक्रिया है?

जवाब- एडवोकेट रूद्र विक्रम सिंह कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने रोपर बनाम सिमंस (2005) केस में फैसला सुनाया था कि सभी किशोरों को एक ही श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। उनकी मैच्योरिटी का लेवल, इंटेलिजेंस कोशेंट (IQ), लाइफ एक्सपीरिएंस और हिस्ट्री के आधार पर पर्सनल जांच की जानी चाहिए। हालांकि 12 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है।

नाबालिग आरोपी के मामले में कानूनी प्रक्रिया कुछ इस प्रकार है।

  • नाबालिग आरोपी के मामले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 के तहत कार्रवाई की जाती है।
  • बाल न्यायालय में मामला दर्ज किया जाता है।
  • बाल न्यायालय नाबालिग आरोपी के मामले की जांच करता है।
  • नाबालिग आरोपी के लिए सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है। जैसेकि काउंसलिंग, शिक्षा और प्रशिक्षण।
  • अगर नाबालिग आरोपी को दोषी पाया जाता है तो बाल न्यायालय सजा का आदेश देता है।
  • नाबालिग आरोपी या उसके अभिभावक बाल न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील कर सकते हैं।

सवाल- किसी आरोपी की उम्र तय करने में चूक का परिणाम हो सकता है?

जवाब- नीचे दिए पॉइंटर्स से समझें–

  • अगर किसी भी व्यक्ति पर नाबालिग के साथ यौन शोषण का केस दर्ज होता है तो उसे किसी भी तरह से जमानत नहीं मिल सकती है। कानून में बदलाव से पहले अग्रिम जमानत ली जा सकती थी।
  • अगर FIR या मेडिकल रिपोर्ट में पीड़ित की उम्र 18 से ज्यादा है तो आरोपी पर POCSO के तहत कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसलिए उम्र निर्धारण करते समय बेहद सतर्कता बरतनी जरूरी है।
  • अगर किसी बालिग आरोपी को नाबालिग बता दिया जाए तो वह गंभीर सजा के प्रावधान से बच सकता है। इसलिए आरोपी या पीड़ित दोनों की सही उम्र का पता होना जरूरी है।

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