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RBI Bank Locker Guidelines Rules Regulations Explained | Noida News | जरूरत की खबर- दीमक खा गई बैंक लॉकर के रूपए: लॉकर के सामान का बैंक कब देता है हर्जाना, क्या हैं RBI के नियम

34 मिनट पहलेलेखक: संदीप सिंह

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बीते दिनों उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर 51 में स्थित सिटीजन कोऑपरेटिव बैंक के लॉकर में रखे 5 लाख रूपए दीमक खा गई। इसकी जानकारी तब हुई, जब कस्टमर ने करीब 3 महीने बाद लॉकर खोला। उसने तुरंत बैंक मैनेजर से मामले की शिकायत की और अपने रुपए वापस दिए जाने की मांग की। हालांकि बैंक मैनेजर ने नियमों को हवाला देते हुए रूपए दिलाने से साफ इनकार कर दिया।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब ग्राहक बैंक लॉकर में सामान सुरक्षित रखने का किराया देता है तो सामान की क्षति होने पर बैंक इसे अपनी गलती क्यों नहीं मानता है।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में बात करेंगे कि बैंक लॉकर को लेकर RBI की गाइडलाइंस क्या हैं? साथ ही जानेंगे कि-

  • बैंक लॉकर में कौन सी चीजें रख सकते हैं?
  • बैंक कब मुआवजे से इनकार कर सकता है?
  • बैंक कब ग्राहक का लॉकर तोड़ सकता है?

एक्सपर्ट: राज शेखर, प्रबंधक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, देहरादून

सवाल- बैंक लॉकर को लेकर बैंक की क्या जवाबदेही है?

जवाब- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 1 जनवरी, 2022 से बैंक लॉकर को लेकर बैंकों की जवाबदेही के संबंध में नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के मुताबिक, बैंक लॉकर में आगजनी, चोरी, बिल्डिंग के ढहने या बैंक कर्मचारियों द्वारा धोखाधड़ी करने पर बैंक हर्जाना देगा। इसके लिए बैंकों की देनदारी लॉकर के वार्षिक किराए से 100 गुना अधिक होगी। यानी अगर कोई ग्राहक बैंक लॉकर में सामान रखने का 2000 रुपए किराया देता है तो बैंक उसे हर्जाने के तौर पर 2 लाख रुपए देगा।

सवाल- जो नोट बैंक लॉकर में दीमक खा गई, उन्हें लौटाने के लिए बैंक बाध्य क्यों नहीं है?

जवाब- देहरादून में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के प्रबंधक राजशेखर बताते हैं कि बैंक लॉकर में कौन-सी चीजें रखी जाएंगी, इसे लेकर RBI की स्पष्ट गाइडलाइंस हैं। इसके मुताबिक, बैंक लॉकर में नकदी या करेंसी नहीं रख सकते हैं।

इसलिए लॉकर में नोट दीमक खा जाए या किसी अन्य वजह से खराब हो जाएं तो ऐसी स्थिति में बैंक की कोई जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए बैंक ग्राहक को मुआवजा नहीं देगा क्योंकि ग्राहक ने बैंक के नियमों का उल्लंघन किया है।

सवाल- बैंक लॉकर में क्या-क्या रख सकते हैं?

जवाब- RBI की नई गाइडलाइंस के मुताबिक, बैंक और ग्राहक के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट साइन होता है। इसमें ग्राहक को डिटेल में यह जानकारी दी जाती है कि वह लॉकर में क्या सामान रख सकता है। अक्सर लोग बैंक लॉकर में ऐसी चीजें रख देते हैं, जो कानूनी तौर पर वैध नहीं हैं।

नीचे दिए ग्राफिक से समझिए कि बैंक लॉकर में किस तरह की चीजें रख सकते हैं।

सवाल- सामान चोरी हो जाए या आग लग जाए तो क्या नियम है?

जवाब- अगर बैंक लॉकर से सामान चोरी हो जाता है, बैंक की बिल्डिंग में आग लग जाती है या बिल्डिंग गिर जाती है, जिससे लॉकर में रखा सामान क्षतिग्रस्त होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बैंक की है। यह बैंक की लापरवाही मानी जाती है। इसके लिए बैंक ग्राहक को हर्जाना देगा।

हालांकि प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, भूकंप या बिजली गिरने के कारण बैंक लॉकर को नुकसान होता है तो इसके लिए बैंक उत्तरदायी नहीं है। ऐसे मामले में कोई मुआवजा नहीं मिलता है।

नीचे दिए ग्राफिक से इसे समझिए-

सवाल- बैंक लॉकर में नोट या करेंसी रखने की अनुमति क्यों नहीं है?

जवाब- बैंक लॉकर में नोट या करेंसी रखने से टैक्स चोरी और मनी लॉन्डरिंग की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए RBI नोट या करेंसी को बैंक लॉकर में रखने की अनुमति नहीं देता है।

सवाल- अगर बैंक लॉकर में रखे डॉक्यूमेंट्स को दीमक खा जाए तो किसकी जिम्मेदारी है?

जवाब- अगर बैंक लॉकर में रखे डॉक्यूमेंट्स को दीमक खा जाए तो इसकी जिम्मेदारी बैंक की होगी। RBI कहता है कि लॉकर में सुरक्षित सामान रखने के लिए ग्राहक किराया देता है। डॉक्यूमेंट्स में दीमक लगना बैंक की लापरवाही है। इसलिए ग्राहक मुआवजे का दावा कर सकता है।

सवाल- अगर किसी ग्राहक से लॉकर की चाबी खो जाए तो क्या होगा?

जवाब- अगर लॉकर की चाबी चोरी या गुम हो गई है तो कस्टमर को तुरंत बैंक को इसकी जानकारी देनी चाहिए। इसके लिए बैंक में एक लिखित रिक्वेस्ट लेटर देना होगा। इसके अलावा लॉकर की चाबी खोने की रिपोर्ट नजदीकी पुलिस स्टेशन में दर्ज करानी होगी।

पुलिस FIR और सभी डॉक्यूमेंट्स को वेरिफाई करने के बाद बैंक नई चाबी के लिए फीस जमा कराएगा। इसके कुछ समय बाद बैंक नई चाबी जारी करने को लेकर जानकारी देगा। अगर खोई हुई चाबी मिल जाती है तो वह बैंक को लौटानी पड़ेगी।

सवाल- जिसके नाम से बैंक का लॉकर, अगर उसकी डेथ हो जाए तो क्या होगा?

जवाब- बैंक लॉकर का इस्तेमाल लोग कीमती ज्वेलरी, प्रॉपर्टी या वसीयत से जुड़े जरूरी कागजात को सुरक्षित रखने के लिए करते हैं।

RBI के नियमों के मुताबिक, लॉकर ओनर की मौत के बाद उसके नॉमिनी को लॉकर एक्‍सेस करने और उसका सामान निकालने का अधिकार है।

हालांकि नॉमिनी को लॉकर का इस्तेमाल करने के लिए बैंक में जरूरी दस्तावेजों के साथ एक आवेदन देना होगा। नॉमिनी बैंक लॉकर को जारी रख सकता है या उसे बंद करा सकता है।

सवाल- क्या किसी बैंक में लॉकर लेने के लिए उसी बैंक में अकाउंट होना जरूरी है?

जवाब- नहीं, बैंक लॉकर के लिए सेम बैंक में सेविंग या करेंट अकाउंट होना बिल्कुल जरूरी नहीं है। आप नियमों का पालन करते हुए किसी भी बैंक में लॉकर ले सकते हैं।

सवाल- बैंक लॉकर का किराया कितना होता है?

जवाब- बैंक लॉकर का किराया उसके साइज और शहर के अनुसार तय होता है। ये किराया महानगर, नगर, कस्बा और ग्रामीण इलाकों में अलग-अलग होता है। आमतौर पर यह किराया 500 रूपए से शुरू होकर 20,000 रूपए के बीच होता है। किराए के अलावा बैंक रजिस्ट्रेशन फीस, विजिटिंग चार्ज, रेंट ओवर ड्यू चार्ज के नाम पर कुछ एक्स्ट्रा चार्ज ले सकता है। सरकारी बैंक लॉकर का रेंट प्राइवेट बैंकों की तुलना में कम होता है।

सवाल- बैंक खुद से कब लॉकर तोड़ सकता है?

जवाब- RBI के मुताबिक, अगर कोई खाताधारक 3 साल तक अपने लॉकर का किराया नहीं चुकाता है या 7 साल तक लॉकर निष्किय पड़ा रहता है तो ऐसी स्थिति में सबसे पहले बैंक ग्राहक को एक पत्र के माध्यम से सूचना देता है। इसके अलावा बैंक रजिस्टर्ड ईमेल ID और मोबाइल नंबर पर भी संपर्क करता है।

अगर किसी भी माध्यम से ग्राहक से संपर्क नहीं हो पाता है तो बैंक सार्वजनिक सूचना का सहारा लेगा। इसके लिए बैंक एक स्थानीय अखबार और एक अंग्रेजी अखबार में सूचना प्रकाशित कराएगा।

इसके बाद भी अगर कोई जवाब नहीं मिलता है तो बैंक के एक अधिकारी और दो गवाहों की मौजूदगी में लॉकर तोड़ने की कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो भी बनाया जाएगा। अगर ग्राहक का कोई नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी बैंक से संपर्क करता है तो पूरी कागजी प्रक्रिया होने के बाद लॉकर से मिला सामान उसे वापस कर दिया जाएगा।

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