58 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी
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हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पूरे देश में करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस साल यह तिथि 20 अक्टूबर, 2024 को है।
करवा चौथ अन्य दिनों के व्रत से बहुत अलग और कठिन होता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चांद दिखने तक निर्जला व्रत रखती हैं। यानी वे इस दिन भोजन और पानी का त्याग करती हैं।
प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद से लेकर एलोपैथी तक सभी चिकित्सा विधाओं में व्रत रखना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना गया है। भोजन का त्याग करने से पाचन तंत्र को आराम करने का मौका मिलता है, लेकिन जल का त्याग करने से डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर स्थिति भी बन सकती है।
हालांकि अच्छी बात ये है कि इसका हल भी करवा चौथ व्रत की परंपरा में ही मिलता है। इस दिन सास अपनी बहू को आशीर्वाद के रूप में सरगी की थाली देती हैं। इस थाली में खाने-पीने की तमाम चीजें होती हैं, जिसे सूर्योदय से पहले ही ग्रहण करना होता है।
हम सरगी की थाली को इस तरह तैयार कर सकते हैं कि इससे दिन भर के लिए जरूरी कैलोरी और न्यूट्रिशन मिल जाए। इसके अलावा हमारे शरीर के लिए जरूरी पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत भी पूरी हो जाए।
इसलिए आज ‘सेहतनामा’ में बात करेंगे करवा चौथ के लिए तैयार की जाने वाली सरगी की थाली की। साथ ही जानेंगे कि-
- परंपरा के अनुसार सरगी की थाली में क्या-क्या होता है?
- हम सरगी की थाली को कैसे और बेहतर बना सकते हैं?
- इस थाली में किन चीजों को शामिल नहीं करना चाहिए?
सरगी की पारंपरिक थाली ऐसे बनती है
सरगी की थाली को चार हिस्सों में बांटा जाता है। इसमें कुछ फल, सूखे मेवे, पका भोजन और मिठाई शामिल की जाती है। थाली में मौजूद सभी चीजें हमारे शरीर के लिए जरूरी हैं।

अब ग्राफिक में दिए सभी पॉइंट्स को विस्तार से समझिए।
बॉडी को हाइड्रेटेड रखते हैं फल
करवा चौथ के निर्जला व्रत में दिन में पानी की कमी से डिहाइड्रेशन हो सकता है। इसलिए सरगी की थाली में ताजे फल शामिल किए जाते हैं। इनमें भरपूर मात्रा में पानी मौजूद होता है, जो दिन में हमारी बॉडी को हाइड्रेटेड रखता है। इसमें हम मिनरल्स और विटामिन C के लिए अनार व अन्य खट्टे फल शामिल कर सकते हैं।
पोषक तत्वों और ऊर्जा के लिए सूखे मेवे
सूखे मेवे कई तरह के पोषक तत्व, कार्ब्स और डाइटरी फाइबर से भरपूर होते हैं। इसलिए सरगी की थाली में सूखे मेवे शामिल किए जाते हैं। मेवे ज्यादातर पारंपरिक व्रत की थाली का हिस्सा होते हैं। सभी पोषक तत्वों के लिए इसमें बादाम, काजू, खजूर और किशमिश जरूर शामिल करें।
पके भोजन से पेट भरा महसूस होता है
सरगी की थाली में कुछ पका भोजन भी होता है। इसमें मठरी, फेनी, सब्जी, रोटी और हलवा शामिल है। मठरी और फेनी तो थाली में पारंपरिक रूप से शामिल होती हैं। इसके अलावा अन्य चीजें पसंद के अनुसार बदल सकते हैं। इनकी मौजूदगी से पेट भरा हुआ महसूस होता है।
स्वाद और इंस्टेंट एनर्जी के लिए मिठाई
भारतीय त्योहारों में मिठाइयों का विशेष स्थान है। इसे ईश्वर का भी प्रिय भोग माना जाता है। इसलिए सरगी की थाली में कुछ मिठाइयां भी रखी जाती हैं। सुबह जल्दी उठकर भोजन करना अजीब लग सकता है। इसलिए मिठाई खाने का स्वाद बढ़ाती है। यह दूध और चीनी से बनी होती है, इसलिए इससे इंस्टेंट एनर्जी भी मिलती है।

सरगी की थाली को और सेहतमंद बना सकते हैं
दिल्ली की सीनियर न्यूट्रिशनिस्ट और ‘वनडाइटटुडे’ की फाउंडर डॉ. अनु अग्रवाल कहती हैं कि परंपरा के अनुसार सरगी की थाली में ज्यादातर जरूरी फूड शामिल किए गए हैं। अच्छी बात ये है कि इसमें शामिल सभी चीजें प्राकृतिक स्रोतों से मिलती हैं। हालांकि हम अपनी थाली में कुछ अन्य चीजें भी जोड़ सकते हैं। इस बारे में नीचे ग्राफिक में देखिए।

अगर सरगी की थाली को ग्राफिक की तरह सेहतमंद तरीके से सजाया जाए तो दिन भर के लिए कैल्शियम, पोटेशियम, प्रोटीन, पानी और कार्ब्स की जरूरत भी पूरी हो सकती है।
ऐसे तैयार करें 1500 कैलोरी की हेल्दी थाली
डॉ. अनु अग्रवाल कहती हैं कि एक स्वस्थ महिला को एक दिन में 1600 से 2200 कैलोरी की आवश्यकता होती है। चूंकि दिन में व्रत रखना है तो एक साथ इतनी कैलोरी का सेवन ठीक नहीं है। इसलिए हम लगभग 1500 कैलोरी की संतुलित थाली तैयार कर सकते हैं। नीचे ग्राफिक में देखिए।

डॉ. अनु अग्रवाल कहती हैं कि हमें थाली तैयार करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जैसे इसमें बहुत शुगरी फूड न शामिल करें। सुबह खाने के साथ चाय पीने से बचें।
सरगी की थाली में शुगरी फूड न शामिल करें
डॉ. अनु अग्रवाल सरगी की थाली में मीठी चीजें कम-से-कम रखने की सलाह देती हैं। ज्यादा शुगरी चीजें खाने से शरीर को तेजी से एनर्जी तो मिल सकती है, लेकिन इन्हें खाने से दिन में भूख भी ज्यादा लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मीठा खाने से शरीर में इंसुलिन ज्यादा रिलीज होता है और इंसुलिन भूख बढ़ा देता है।
हालांकि वह कहती हैं कि अगर यह मिठास फल और मेवों से मिल रही है तो ये काफी हद तक ठीक है क्योंकि इनमें कॉम्प्लेक्स कार्ब होता है और भरपूर मात्रा में फाइबर भी मौजूद होता है। इसके अलावा फलों में पानी भी होता है, जो बॉडी को हाइड्रेटेड रहने में मदद करता है।
सुबह चाय पीने से बचें
- डॉ. अनु अग्रवाल सरगी की थाली में चाय शामिल करने से मना करती हैं क्योंकि चाय में कैफीन होता है।
- ICMR के अनुसार कैफीन आयरन और दूसरे न्यूट्रिशन के एब्जॉर्पशन में बाधा उत्पन्न करता है। हमें किसी मील के आसपास चाय-कॉफी पीने से बचना चाहिए।
- इसके अलावा चाय में मौजूद कैफीन और लैक्टिक शुगर पेट में जाकर लैक्टिक एसिड और गैस का कारण बन सकते हैं। इससे पेट खराब हो सकता है, उल्टियां हो सकती हैं। इसके कारण डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है, जो निर्जला व्रत में मुश्किल पैदा कर सकती है।
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