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41 मिनट पहलेलेखक: शैली आचार्य
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आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।

इस संस्कृत श्लोक का अर्थ है- “आलस (आलस्य) ही मनुष्य के शरीर में रहने वाला सबसे बड़ा दुश्मन है।”
‘आज ये रहने देते हैं, कल कर लेंगे।’ हमने बहुत से लोगों को काम अगले दिन के लिए टालते सुना या देखा होगा। जैसे आज नहीं, कल से एक्सरसाइज करूंगा; मंडे से योगा क्लास जाऊंगी; बिजली का बिल कल भर देंगे, वगैरह-वगैरह।
अगर आप में भी ऐसे ही काम टालने की आदतें हैं तो आप न केवल अपने कामों को लेकर लेट हो रहे हैं बल्कि अपने स्वास्थ्य, रिश्तों और पर्सनल ग्रोथ पर भी उतना ही नकारात्मक असर डाल रहे हैं।
ग्लोबल हेल्थ जर्नल ‘द लैंसेट’ में पब्लिश एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लगभग 50% लोग अपनी दिनचर्या में पर्याप्त मात्रा में फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते हैं। इनमें भारतीय महिलाओं की संख्या तकरीबन 57% है और पुरुषों की 42% है।
इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारतीय अपने आपको फिजिकली फिट रखने को लेकर कितने आलसी हैं।
लेकिन ये आलस सिर्फ स्वास्थ्य के मामले में ही नहीं बल्कि जीवन के और मामलों में भी दिखता है। हममें से कई लोग अपने निजी काम, ऑफिस के काम और रिश्तों में भी भरपूर आलस करते हैं, जिसके परिणाम हमें बाद में भुगतने पड़ते हैं।
जब हम किसी काम को करने में आलस करते हैं तो या तो वो काम कभी पूरा नहीं हो पाता है या फिर किसी और के पास चला जाता है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का एक प्रसिद्ध कथन भी है-
‘इंतजार करने वालों को सिर्फ उतना ही मिलता है, जितना कोशिश करने वाले छोड़ जाते हैं।’
तो आज हम ‘रिलेशनशिप’ कॉलम में बात करेंगे कि रिश्तों में, वर्कप्लेस पर और पर्सनल लाइफ में आलसी होने का मतलब क्या है। साथ ही जानेंगे कि-
- जीवन में आलस करने से क्या नुकसान हो सकते हैं?
- आलस से कैसे बचा जा सकता है?
आलस क्यों आता है?
आलस का मतलब है, किसी काम को करने की इच्छा न होना। हर काम को कल पर टाल देना या किसी काम में पूरी तरह मन न लगना। हर काम को टालने की आदत ही आलस है, जिसे अंग्रेजी में प्रोक्रैस्टिनेशन कहते हैं।
ये आदत हमें आलसी बना सकती है और धीरे-धीरे यह हमारा लिविंग पैटर्न बन सकता है। यह आदत हमारी पर्सनल ग्रोथ को भी धीमा कर सकती है। प्रोक्रैस्टिनेशन एक तरह की आदत है, जिसमें व्यक्ति किसी काम को करने से पहले बिना वजह देरी करता है या उसे टालता है। यह एक मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति किसी काम को करने के लिए प्रेरित नहीं होता है और उसे करने से पहले अन्य चीजों में व्यस्त रहता है। प्रोक्रैस्टिनेशन के कुछ सामान्य लक्षण हैं, जैसे-
- काम को टालना और उसे करने में अनावश्यक देरी करना।
- काम को पूरा करने में मुश्किल महसूस होना।
- जरूरी काम करने की बजाय अन्य चीजों में व्यस्त रहना।
- टाइम मैनेजमेंट न कर पाना।
आलस के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
आलसी होने के कई कारण हो सकते हैं। अनियमित और खराब लाइफस्टाइल आलसी होने के प्रमुख कारणों में से एक है। शरीर में ऊर्जा की कमी होने से भी आलस आता है।
मौजूदा समय में जहां स्मार्टफोन हाथ से छूटता ही नहीं है, यह लोगों के आलसी होने का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, स्मार्टफोन पर ज्यादा वक्त बिताना, बढ़ा हुआ स्क्रीनटाइम और सोशल मीडिया की वजह से लोगों की फिजिकल एक्टिविटी कम हो गई है।
इसके साथ ही और भी कारण हैं, जिनकी वजह से लोग आलसी बन रहे हैं। नीचे ग्राफिक में आसानी से समझिए-

आलस के नुकसान बहुत सारे
आलस एक ऐसी चीज है, जिसका कोई फायदा नहीं है। चाहे पर्सनल रिलेशनशिप हो, प्रोफेशनल ग्रोथ हो या फिर खुद का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, आलस जीवन के हर पहलू को नकारात्मक ढंग से ही प्रभावित करता है।
रिलेशनशिप में आलसी होने का क्या मतलब है?
रिलेशनशिप में आलसी होना यानी अपने पार्टनर को ‘टेकन फॉर ग्रांटेड’ लेना। सरल शब्दों कहें तो किसी व्यक्ति को कम आंकना और यह मान लेना कि वह हमेशा हमारे साथ रहेगा। वो है तो हमें किसी चीज को करने की जरूरत नहीं है। अगर आपको लगता है कि आपका साथी आपको टेकन फॉर ग्रांटेड ले रहा है तो ये आपके रिश्ते को खराब कर सकता है।

वर्कप्लेस पर आलस का क्या असर होता है?
वर्कप्लेस पर भी आलस का उतना ही खराब असर होता है, जितना कि हमारे रिश्तों पर। आलस करने से कर्मचारी अपने काम को समय पर और बेहतर ढंग से पूरा नहीं कर पाता है।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा है आलस
आलस का न केवल आपकी पर्सनल लाइफ पर बुरा असर पड़ता है बल्कि हेल्थ पर भी इसके दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं। यह आपको शारीरिक गतिविधि न करने के लिए भी मजबूर करता है और यह तो हम सभी जानते हैं कि फिजिकल एक्टिविटी शरीर के लिए बहुत जरूरी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी कहता है कि स्वस्थ रहने के लिए आपको हर सप्ताह कम-से-कम 150 मिनट की फिजिकल एक्सरसाइज करनी चाहिए, लेकिन 50 प्रतिशत भारतीय इस मानक को भी पूरा नहीं करते हैं।
पर्सनल ग्रोथ पर आलस का क्या असर होता है?
आलस का पर्सनल ग्रोथ पर भी नकारात्मक असर हो सकता है, जो व्यक्ति के विकास और आत्म-सुधार में बाधा बन सकता है। आलस अपना लक्ष्य प्राप्त करने की राह में खड़ी सबसे बड़ी दीवार है।
- आलस व्यक्ति को अपने दोष और कमजोरियों पर काम करने से रोकता है, जिससे व्यक्तिगत विकास में कमी आ सकती है।
- आलस व्यक्ति को नए कौशल सीखने से रोक सकता है, जिससे वो पिछड़ सकता है।
- आलस व्यक्ति के आत्मविश्वास को कम कर सकता है, क्योंकि आलस की वजह से उसका विकास ही रुक गया है, वो पिछड़ गया है।
- इसका मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है, जैसे ये स्ट्रेस, एंग्जाइटी और डिप्रेशन को बढ़ा सकता है।
आलस से उबरने के लिए क्या करें?
आलस एक ऐसी बुरी आदत है, जिसकी वजह से अच्छे अवसर भी हाथ से निकल जाते हैं। इस बुराई को छोड़ देने में ही भलाई है। आलस को दूर करने में समय लगता है, इसलिए धैर्य रखें और अपने प्रयासों पर अडिग रहें। हेल्दी खाना खाने, पर्याप्त नींद लेने और स्ट्रेस मैनेज करने से भी आलस दूर करने में मदद मिलती है।





